कोरोना वायरस के मरीजों को AMR का भी खतरा: WHO

वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑगनाइजेशन (WHO) के मुताबिक कोरोना के मरीज अस्‍पताल में भर्ती किया जाए तो उसे बैक्‍टीरियल को-इन्‍फेक्‍शन संभव है। ऐसे में उसे एंटीबायोटिक्‍स की जरूरत पड़ेगी मगर एंटीबायोटिक्‍स के इस्‍तेमाल से एक दिक्‍कत हो सकती है और उसका नाम है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्‍टेंस यानी AMR।
नोवेल कोरोना वायरस ने दुनियाभर में 22 लाख से ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को इन्‍फेक्‍ट किया है। वैक्‍सीन ना होने के चलते करीब डेढ़ लाख लोग इस महामारी से अपनी जान गंवा चुके हैं। बहुत से मरीजों को ठीक भी किया गया है मगर कोई स्‍थायी इलाज नहीं मिला है। इस वायरस के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्‍स की जरूरत नहीं पड़ती।
क्‍या है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्‍टेंस?
WHO के मुताबिक बैक्‍टीरिया पैरासाइट्स, वायरस और फंजाई से होने वाले इन्‍फेक्‍शंस के इलाज में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्‍टेंस रुकावट पैदा करता है। ये तब होता है जब एंटीमाइक्रोबियल ड्रग्‍स दिए जाने पर माइक्रोऑर्गनिज्‍म्‍स (क्‍टीरिया, पैरासाइट्स, वायरस, फंजाई आदि) बदल जाते हैं। जो ऑर्गनिज्‍म्‍स बदल जाते हैं, वो सुपरबग्‍स कहलाते हैं। नतीजा ये होता है कि दवाएं बेअसर हो जाती हैं और शरीर में इन्‍फेक्‍शन बना रहता है और दूसरों में फैलने का खतरा भी।
AMR के चलते मुश्किल हो जाएगा इलाज
AMR सीधे-सीधे ना सही, मगर COVID-19 मरीजों के इलाज पर इनडायरेक्‍टली जरूर असर डाल सकता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ताजा गाइडलाइंस के अनुसार क्लिनिकल डायग्‍नोसिस के बाद ही एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट शुरू किया जाना चाहिए।
दरअसल, गंभीर मामलों में Covid-19 से निमोनिया हो सकता है। और उसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक्‍स देना जरूरी है। अगर किसी एंटीबायोटिक रेजिस्‍टेंट बैक्‍टीरिया (ARB) की वजह से सेकेंडरी इन्‍फेक्‍शन हुआ तो हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं।
AMR साबित हो सकता है बड़ा खतरा
निमोनिया के इलाज की खातिर सबसे पहले ब्रॉड-स्‍पेक्‍ट्रम मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक्‍स दी जाती हैं। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स का दावा है कि इन एंटीबायोटिक्‍स के लिए पैथोजन रेजिस्‍टेंट बढ़ता जा रहा है इसलिए इलाज के लिए महंगी और थर्ड जेनरेशन की दवाओं का लंबे समय तक इस्‍तेमाल करना पड़ता है। भारत में हर साल 50 हजार से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत फर्स्‍ट-लाइन एंटीबायोटिक्‍स के पैथोजन रेजिस्‍टेंस के चलते हो जाती है। एक रिसर्च के अनुसार 2050 तक दुनिया में हर साल 1 करोड़ लोग AMR के चलते अपनी जान गंवाने लगेंगे।
करने होंगे इन्‍फेक्‍शन कंट्रोल के उपाय
AMR के कोरोना ट्रीटमेंट पर असर से जुड़ा डेटा अभी पूरी तरह से सामने नहीं आया है। हालांकि चीन के वुहान, जहां से ये वायरस पूरी दुनिया में फैला, वहां का डेटा दिखाता है कि Covid-19 से मौतों पर AMR का प्रभाव पड़ा है। वहां शुरुआती सैंपल्‍स में जिन 54 मरीजों की मौत हुई, उनमें से 27 में सेकेंडरी इन्‍फेक्‍शन मिला था। एक मरीज को छोड़कर बाकी सबका इलाज एंटीबोयाटिक्‍स से किया गया इसीलिए इन्‍फेक्‍शन कंट्रोल के उपाय बेहद जरूरी हो जाते हैं। कोरोना से इन्‍फेक्‍शन के साथ अगर कोई बैक्‍टीरियल इन्‍फेक्‍शन हो गया तो मरीज की हालत बेहद खराब हो सकती है।
-एजेंसियां

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