उपभोक्ता फोरम ने इंडिगो पर ठोका 85.5 लाख रुपये का जुर्माना

लखनऊ। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फ्लाइट ऑपरेटर इंडिगो पर हर्जाना लगाया है। इंडिगो पर यह जुर्माना विनय शंकर तिवारी को खराब सर्विस देने और अनुचित व्यापार के कारण लगाया गया है। अब कंपनी को शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर 85.5 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
आयोग के सदस्य राजेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि फ्लाइट ऑपरेटर कंपनी इंडिगो को 35 लाख रुपये मुआवजे के रूप में और 50 लाख रुपये मानसिक पीड़ा के लिए देने होंगे। इसके अलावा 50,000 रुपये मामले की लागत के रूप में 10 पर्सेंट की दर से ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
15 अप्रैल 2013 की घटना
विनय शंकर तिवारी ने 15 अप्रैल 2013 को क्लियरट्रिप के जरिए लखनऊ से दिल्ली के लिए हवाई टिकट बुक किया था। इंडिगो फ्लाइट नंबर 6 ई -141 का ईआरबीवीएलएस था जबकि प्रस्थान का समय सुबह 10.50 बजे था। वह अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे और फ्लाइट में अपनी आवंटित सीट नंबर 5ए पर बैठ गए।
फ्लाइट में दुर्व्यवहार का आरोप
शिकायतकर्ता ने बताया कि टेक-ऑफ से ठीक पहले, इंडिगो के केबिन क्रू ने उन्हें बताया किया कि उनका टिकट कैंसल कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ फ्लाइट में बुरा बर्ताव किया गया और अपमानित करते हुए फ्लाइट से बाहर कर दिया गया।
तिवारी ने क्लियरट्रिप से पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि उनकी तरफ से टिकट रद्द नहीं किया गया है। इंडिगो से आगे की पूछताछ में पता चला कि शैलेंद्र नाम के शख्स ने सुबह 7.38 बजे टिकट रद्द कर दिया था।
टिकट कैंसल वाले का नहीं लिया कॉन्टैक्ट नंबर
आयोग ने कहा कि अगर यह माना जाता था कि टिकट सुबह 7.38 बजे रद्द कर दिया गया था, तो उन्होंने तिवारी को चेक इन करने की अनुमति क्यों दी। इंडिगो एयरलाइंस ने न तो उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर लियाऔर न ही तिवारी को कोई मेसेज का स्क्रीनशॉट दिया।
कॉन्ट्रैक्टर के साथ हुआ अनुचित व्यवहार
परिस्थितियों और सबूतों को देखने के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि एयरलाइंस की सर्विस में कमी के चलते यह सब हुआ। आयोग ने माना की एक नेशनल स्तर के कॉन्ट्रैक्टर के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जो अनुचित था। वह दिल्ली में एक जरूरी बैठक में भाग लेने जा रहे थे। उन्हें बहुत नुकसान हुआ।
-एजेंसियां

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