5 जजों की संवैधानिक पीठ 10 जनवरी से करेगी मंदिर मामले की सुनवाई

नई दिल्‍ली। अयोध्या मसले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 जजों की संवैधानिक पीठ का गठन कर दिया है। यह बेंच 10 जनवरी से मामले की सुनवाई करेगी। इस बेंच का नेतृत्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई करेंगे। उनके अलावा अन्य 4 जज जस्टिस एस. ए. बोब्डे, जस्टिस एन. वी. रमन्ना, जस्टिस यू. यू. ललित और जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ शामिल होंगे।
बता दें कि इस मसले पर तेजी से सुनवाई की मांग की जाती रही है। 6 जनवरी को अदालत ने इस मसले पर सुनवाई करते हुए इसके लिए बेंच गठित करने की बात कही थी। इसके साथ ही अदालत ने 10 जनवरी को अगली सुनवाई की बात कही थी।
बता दें कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल 29 अक्टूबर को कहा था कि यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी। बाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था परंतु न्यायालय ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था।
न्यायालय ने कहा था कि 29 अक्टूबर को ही इस मामले की सुनवाई के बारे में आदेश पारित किया जा चुका है। हिन्दू महासभा इस मामले में मूल वादकारियों में से एक एम सिद्दीक के वारिसों द्वारा दायर अपील में एक प्रतिवादी है।
इससे पहले, 27 सितंबर, 2018 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गयी टिप्पणी पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास नये सिरे से विचार के लिये भेजने से इंकार कर दिया था। इस फैसले में टिप्पणी की गयी थी कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।
अयोध्या प्रकरण की सुनवाई के दौरान एक अपीलकर्ता के वकील ने 1994 के फैसले में की गयी इस टिप्पणी के मुद्दे को उठाया था।
सियासत भी गरमाई
सुनवाई से पहले ही इस मामले में सियासत तेज हो गई है। विहिप सहित कई हिंदू संगठन राम मंदिर का निर्माण करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। राजग के सहयोगी शिवसेना ने कहा, अगर 2019 चुनाव से पहले मंदिर नहीं बनता तो लोगों से धोखा होगा। इसके लिए भाजपा और संघ को माफी मांगनी पड़ेगी।
वहीं, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने अध्यादेश लाने का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को सुप्रीम कोर्ट का ही आदेश मानना चाहिए।
-एजेंसियां

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