कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल बोले, पार्टी के लोग ही मेरी टांग खींच रहे हैं

अहमदाबाद। गुजरात में हुए छह नगर निगमों के लिए चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी में मतभेद उभरने लगे हैं। पाटीदार बहुल इलाकों में मिली हार के बाद हार्दिक पटेल की आलोचना भी हो रही है। करीब दो साल पहले कांग्रेस में शामिल हुए युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने पार्टी की खुलकर अपनी बात उठाई है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक ने कहा कि पार्टी उनका सही से प्रयोग नहीं कर पा रही है। 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए युवा नेता ने कहा कि पार्टी के भीतर अपने ही नेता उनकी टांग खींचने का काम कर रहे हैं।
प्रदेश नेतृत्व ने एक भी सभा आयोजित नहीं की
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में हार्दिक पटेल के हवाले से कहा गया है कि राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने स्थानीय निकाय चुनाव से पहले उनकी एक भी सार्वजनिक सभा आयोजित नहीं की। हार्दिक ने कहा कि मैं एक दिन में 25 मीटिंग करने के लिए तैयार था। पटेल ने उम्मीद जताई की यदि वरिष्ठ नेता अहमद पटेल जिंदा होते तो वह 219 सीटों पर बिना मुकाबला किए भाजपा को जीत हासिल करने नहीं देते। हार्दिक ने कहा कि मैंने बार-बार पार्टी से कहा कि हम इसलिए आगे आए हैं कि हम लोगों के बीच घूमे हैं। यहां तक कि आज भी मैं लगातार लोगों से मिल रहा हूं।
तो सूरत में नहीं रहते खाली हाथ
हार्दिक ने कहा कि पार्टी ने मेरा सही से प्रयोग किया होता तो हम सूरत में खाली हाथ नहीं होते। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मतदान से एक दिन पहले मुझे सूरत में सभा करने को कहा जबकि मैं सात दिन पहले से ही अपना कार्यक्रम बना चुका था। सूरत की 120 सीटों में से कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) की स्थापना करने वाले पटेल ने पिछले साल जून में ही प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभाला था। इसके बाद से उन्होंने आंदोलन समिति से दूरी बना ली थी। इससे नाराज उनके कई सहयोगी आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे।
निकाय चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 55 सीटें
गुजरात में हुए छह नगर निगम के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को महज 55 सीटें मिली थीं। सत्ताधारी भाजपा ने 576 में से 483 सीटें जीती। भाजपा ने राज्य के सभी छह नगर निगमों- अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, जामनगर और भावनगर में सत्ता बरकरार रखी। सूरत महानगरपालिका की कुल 120 सीटों में से बीजेपी 93 और आप ने 27 सीटें जीती हैं। कांग्रेस का यहां खाता भी नहीं खुला।
-एजेंसियां

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