कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, वोट कटवा है ओवैसी की पार्टी

नई दिल्‍ली। कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी ने असदुद्दीन ओवैसी का नाम लेकर बीजेपी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि ओवैसी की पार्टी वोट कटवा है और वह बीजेपी की मदद करती है। एबीपी न्यूज़ के विशेष कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने बंगाल चुनावों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बंगाल में पहले धारणा बनी हुई थी कि यह चुनाव बीजेपी बनाम टीएमसी होगा लेकिन यह सही नहीं है। अब मुकाबले में तीसरा पक्ष भी है जिसमें कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी का गठबंधन है। यह तीसरा पक्ष हर दिन जबरदस्त तरीके से उभरकर आगे आ रहा है। मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि बंगाल का चुनाव त्रिपक्षीय होगा। TMC और बीजेपी अफवाह फैला रहे हैं कि द्विपक्षीय चुनाव होगा।
जब उनसे पूछा गया कि अगर ऐसा है तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी यहां क्यों दिखाई नहीं देते हैं जबकि वे दूसरे राज्यों में सभाएं कर रहे हैं?
इस पर चौधरी ने कहा कि बीजेपी बंगाल में ममता बनर्जी के भरोसे से आई है और पिछले साल लोकसभा के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने बालाकोट का मुद्दा उछालकर सांप्रदायिक राजनीति की बदौलत कुछ सीटें मिली हैं। आप कहते हैं कि बीजेपी की तरह एक के बाद एक कांग्रेस के नेता क्यों नहीं आ रहे हैं, मैं तो इसे कमजोरियां मानता हूं। मोदी जी कहते हैं देशवालों को कि आत्मनिर्भर बनो लेकिन बंगाल में बीजेपी मोदी और अमित निर्भर बनते जा रहे हैं लेकिन कांग्रेस वहां आत्मनिर्भर है।
उन्होंने कहा कि हमारे सारे नेता आएंगे, इतना जल्दबाजी क्या है। हर गांव, पंचायत में हमारे कार्यकर्ता लड़ रहे है। यह बीजेपी की कमजोरी है कि वह हर बात में नड्डा, अमित शाह और मोदी जी को बुलाती है।
बंगाल में बीजेपी का भविष्य दिल्ली के नेताओं पर निर्भर है जबकि कांग्रेस आत्मनिर्भर है। एक सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी तो बीजेपी की मदद से चलते हैं। ये वोटकटुआ हैं। चाहे बिहार, महाराष्ट्र हो या बंगाल … बीजेपी हर जगह ओवैसी को वोट काटने के लिए लगाया जाता है। हम नहीं चाहते हैं कि कोई धार्मिक संगठन न जुड़े जिससे कोई परेशानी खड़ी हो। हम चाहते हैं कि लोकतांत्रिक और सेक्युलर पार्टी ही साथ आए। हम चाहते हैं कि बंगाल ही नहीं पूरे देश में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष पार्टियां एकजुट हो जाएं।
ISF के साथ कांग्रेस अलायंस पर विचार कर रही है। अधीर ने कहा कि वह अपने मैनिफेस्टो में लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हैं। दरगाह का किस-किस जगह पर असर है? इस पर अधीर ने कहा कि दरगाह पर हिंदू और मुसलमान, कांग्रेस और बीजेपी के लोग भी जाते हैं। बंगाल में दरगाह कोई केवल मुसलमानों के लिए नहीं है, वहां हर धर्म के लोग जाते हैं। दरगाह वाले कभी ममता बनर्जी के साथ जुटे थे। दरगाह का मतलब ये नहीं है कि वे आतंकवाद पनपने का प्रतिष्ठान बन चुके हैं। अजमेर शरीफ की तरह फुरफुरा शरीफ है।
क्या मुस्लिम के वोट बैंक की तरफ कांग्रेस जा रही है? अगर सेक्युलर फ्रंट की बात होती है तो उसमें दलित, एससी, दरगाह, उसमें बहुत सारे लोग शामिल है, वह फ्रंट है मतलब उनके साथ भी काफी लोग हैं।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *