सर्दी-खांसी: किचन में मौजूद नेचुरल एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें

अगर आपको भी सर्दी-खांसी या वायरल इंफेक्शन होते ही डॉक्टर से बिना पूछे OTC ड्रग लेने की आदत है तो अपनी ये आदत आज ही बदल दें और किचन में मौजूद इन नेचुरल एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें। इन नेचुरल एंटीबायोटिक्स का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है और ये बेहद असरदार भी हैं।
इस वक्त मौसम तेजी से बदल रहा है। सर्दी जा रही है, गर्मी आ रही है, दिन के वक्त तेज धूप की वजह से गर्मी हो जाती है जबकी सुबह-शाम हल्की ठंड रहती है। ऐसे में वायरल इंफेक्शन, सर्दी-खांसी, जुकाम और बॉडी पेन के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इन कॉमन प्रॉब्लम्स को लेकर जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह आपको एंटीबायोटिक्स प्रिस्क्राइब करते हैं। कई बार तो लोग डॉक्टर से बिना पूछे केमिस्ट से OTC (ओवर द काउंटर) दवा लेकर खा लेते हैं। लेकिन इन एंटीबायोटिक्स का जितना फायदा है उतने ही साइड इफेक्ट्स भी हैं लिहाजा बात-बात पर गोली खाने की बजाए बेहतर है कि आप अपने किचन में मौजूद इन नेचुरल एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें जिससे आपकी बीमारी भी दूर हो जाएगी और आपकी इम्यूनिटी यानी रोगों से लड़ने की क्षमता भी मजबूत बनेगी।
​10 में 1 व्यक्ति को एंटीबायोटिक से साइड इफेक्ट
नेशनल हेल्थ सर्विस NHS की मानें तो एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से हर 10 में से 1 व्यक्ति को जहां पाचन तंत्र से जुड़े साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ता है वहीं 15 में से 1 व्यक्ति को इन ऐलर्जी भी हो जाती है। साथ ही एंटीबायोटिक्स के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होने से बैक्टीरिया भी ड्रग-रेजिस्टेंट होते जा रहे हैं। साल 2014 में हुई एक स्टडी में यह बात सामने भी आयी थी कि हर्बल थेरपी, केमिकल एंटीबायोटिक जितनी ही असरदार होती है और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। ऐसे में OTC ड्रग लेने की बजाए इन 5 नेचुरल एंटीबायोटिक्स को डायट में करें शामिल।
बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ने में असरदार है लहसुन
एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज, बीमारियों को रोकने की क्षमता और औषधीय गुणों की वजह से लहसुन का इस्तेमाल आज से नहीं बल्कि सदियों से होता आ रहा है। बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ने में बेहद असरदार है लहसुन। लहसुन में पाया जाने वाला कम्पाउंड ऐलिसिन, सैल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया का भी खात्मा करने में बेहद असरदार है। लहसुन वैसे तो बेहद फायदेमंद होता है लेकिन जरूरत से ज्यादा लहसुन खाना भी हानिकारक साबित हो सकता है इसलिए हर दिन लहसुन की 2 कली से ज्यादा न खाएं। अगर आप पहले से ही किसी बीमारी की दवा खा रहे हैं तो लहसुन खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
सदियों पुराना एंटिबायॉटिक है शहद
अगर आप सोचते हैं कि शहद तो मीठा होता है और इसलिए यह सेहत के लिए नुकसानदेह है तो आप पूरी तरह से गलत हैं। शहद सबसे पुराना और फायदेमंद एंटिबायॉटिक है जिसका इस्तेमाल कई पीढ़ियों से होता आ रहा है। लंबे समय से अगर कोई चोट ठीक ना हो रही हो तो उसे ठीक करने में, अगर स्किन जल जाए तो उसे ठीक करने में, अल्सर, स्किन प्रॉब्लम और कई तरह से बैक्टीरियल इंफेक्शन को दूर करने में बेहद असरदार माना जाता है शहद। 2011 की एक स्टडी की मानें तो 60 तरह के बैक्टीरिया को रोकने में फायदेमंद है शहद। शहद में पाया जाने वाला हाइड्रोजन पेरॉक्साइड एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टी से भरपूर होता है।
एंटिऑक्सिडेंट से भरपूर हल्दी
हल्दी में पाया जाने वाला कर्क्युमिन नाम का तत्व बेहद पावरफुल एंटिऑक्सिडेंट है और यह एंटी-इन्फ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज से भी भरपूर होता है। भारतीय किचन में पाया जाने वाला सबसे कॉमन मसाला है हल्दी जो शरीर में फ्री रैडिकल्स की वजह से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद करता है। साथ ही साथ हल्दी का नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में बीमारी फैलाने वाले कई तरह के बैक्टीरिया को भी रोकने में मदद मिलती है। साथ ही साथ हल्दी सिर्फ बैक्टीरिया ही नहीं बल्कि फंगस और ट्यूमर सेल्स के ग्रोथ को भी रोकती है। कुल मिलाकर देखें तो हल्दी भी एक पावरफुल नेचुरल एंटिबायॉटिक है।
कई तरह के बैक्टीरिया से लड़ता है अदरक
एंटी-बैक्टीरियल और ऐंटि-इन्फ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज से भरपूर होता है अदरक। वैज्ञानिकों की साइंटिफिक कम्यूनिटी भी अदरक को एक पावरफुल नेचुरल एंटिबायॉटिक मानती है। वैसे तो कई स्टडीज में यह बात सामने आ चुकी है लेकिन साल 2017 की एक स्टडी में कई तरह के बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार है अदरक ये बात साबित हो चुकी है। अदरक में जिन्जेरॉल पाया जाता है जो की एक बेहतरीन एंटी-माइक्रोबियल प्रॉपर्टी है जो माइक्रोब्स और बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार है। बैक्टीरिया से लड़ने के साथ ही अदरक, जी मिचलाने और उल्टी आने की समस्या को भी दूर करता है।
थाइम (thyme) इसेंशल ऑइल
सांस से जुड़ी प्रॉब्लम्स, इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और जलन, गैस्ट्रिक की प्रॉब्लम जैसी समस्याओं का समाधान करने में फायेदमंद माना जाता है थाइम इसेंशल ऑइल। थाइल ऑइल में एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज भी पायी जाती हैं तो बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है। हालांकि इस ऑइल का इस्तेमाल सिर्फ बाहर से (externally) ही करना चाहिए। साथ ही साथ थाइम ऑइल को सीधे स्किन पर लगाने से जलन, खुजली या इरिटेशन हो सकती है इसलिए इसे नारियल तेल या ऑलिव ऑइल जैसे किसी तेल के साथ मिलाकर ही यूज करना चाहिए।
बैक्टीरिया से लड़ने में फायदेमंद है लौंग
लौंग यानी क्लोव का इस्तेमाल सदियों से दांतों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में किया जाता रहा है लेकिन अब कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि क्लोव वॉटर एक्सट्रैक्ट यानी लौंग का पानी ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया के खिलाफ भी बेहद असरदार है लिहाजा लौंग को भी नेचुरल एंटिबायॉटिक के तौर पर देखा जा सकता है।
​ऑरिगैनो में है एंटिऑक्सिडेंट
ऑरिगैनो में मौजूद एंटिऑक्सिडेंट आपके इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। साथ ही इसमें ऐंटि-इन्फ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज भी पायी जाती हैं जिस वजह से यह भी आपके किचन में मौजूद नेचुरल एंटिबायॉटिक का काम करता है। खासकर ऑइल के रूप में। ऑरिगैनो इसेंशल ऑइल अल्सर और इन्फ्लेमेशन की समस्या दूर करने के साथ ही बैक्टीरिया से भी लड़ने में मदद करता है।
-एजेंसियां

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