अक्षय तृतीया को मनाई जाती है शस्त्र और शास्त्र के चिरंजीवी देवता भगवान परशुराम की जयंती

ChiranjeeVI Deity of Arms and Shastra Lord Parasurama birth anniversary celebrated on Akshaya Tritiya
अक्षय तृतीया को मनाई जाती है शस्त्र और शास्त्र के चिरंजीवी देवता भगवान परशुराम की जयंती

अक्षय तृतीया को मनाई जाती है शस्त्र और शास्त्र के चिरंजीवी देवता भगवान परशुराम की जयंती, भगवान परशुराम भगवान विष्णु के दशावतारों में छठे और चौबीस अवतारों में 18वें हैं। परशुराम का अवतरण वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था।

राजा प्रसेनजीत की सुपुत्री रेणुका और भृगुवंशीय महर्षि जमदग्नि के पांच पुत्रों में सबसे छोटे परशुराम हैं, जिन्हें शिव की कृपा से दिव्य परशु प्राप्त हुआ। शिव तेज से प्रकाशित परशु धारण करने के कारण ही इन्हें परशुराम कहा जाता है।

महाभारत, नृसिंह पुराण, ब्रह्मवैवर्तपुराण, भक्तमालादि में परशुराम की कथा आई है- एक बार कार्तवीर्य सहस्नजरुन ने जब दत्तात्रेय की आराधना से सार्वभौम राज्य प्राप्त कर लिया, तब वह महर्षि जमदग्नि के आश्रम पर चतुरंगिणी सेना के साथ गया।

महर्षि ने अपने आश्रम में कामधेनु गाय के दूध से बने प्रसाद के साथ सभी अतिथियों का सत्कार किया। सहस्नजरुन की दृष्टि कामधेनु गाय पर गड़ गई। पहले तो उसने महर्षि जमदग्नि से कामधेनु गाय के लिए याचना की, फिर बलपूर्वक कामधेनु को छीनना चाहा और इसी क्रम में जमदग्नि ऋषि का वध कर दिया।

परशुराम की प्रतिज्ञा
जब परशुराम आश्रम लौटे तो माता का विलाप सुनकर परशुराम ने प्रतिज्ञा की कि -‘इक्कीस बार इस पृथ्वी को क्षत्रियों से शून्य कर दूंगा और उस कार्तवीर्य सहस्नजरुन को नष्ट करके ही चैन लूंगा।’ भगवान शंकर की कृपा से परशुराम ने सहस्नजरुन का वध कर दिया। उसके बाद उसके दस हजार पुत्रों को भी पराजित कर दिया।

आचार्य द्रोण को दुर्लभ ब्रह्मास्त्र का ज्ञान देने वाले, भीष्म पितामह को अस्त्र विद्या की शिक्षा देने वाले परशुराम से कर्ण नकली ब्राह्मण बन कर समस्त विधाएं सीखने गए। एक बार जब जंगल में परशुराम थक गए, तब वे कर्ण की गोद में सिर रख कर सो गए। तभी एक कीड़ा कर्ण की जांघ पर आ गया और खून पीने लगा। गुरु की नींद में बाधा न पड़े, इस बात का ख्याल कर कर्ण बिना हिले-डुले बैठे रहे।

जब परशुराम की नींद खुली तो उन्होंने कर्ण से सारी बात पता कर ली। परशुराम बोले, ‘तुम ब्राह्मण नहीं हो सकते, क्योंकि कोई ब्राह्मण कुमार इतना कष्ट नहीं सह सकता। तुमने मेरे साथ छल किया है। मैं तुम्हें श्रप देता हूं कि मैंने जो विद्या तुम्हें सिखाई है, जरूरत के समय तुम उसे भूल जाओगे।’ महाभारत के युद्ध में कर्ण के साथ हुआ भी यही।

श्री परशुराम से जुड़े तीर्थ स्थान, कुंड और देवालय पूरे देश में हैं, जहां हर वर्ष परशुराम जयंती के दिन रौनक देखते बनती है। सचमुच शस्त्र और शास्त्र के समन्वय वाले प्रणम्य देव हैं परशुराम, जिन्हें चिरकाल से महेंद्र पर्वत पर निवास करने के कारण चिरंजीवी देवता भी कहा जाता है।

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