मेडीकल उपकरण बाजार पर चाइनीज कंपनियों का कब्जा, 90% हैं चीनी उत्पाद

नई द‍िल्ली। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों व उनके पर‍िजनों को ऑक्सीमीटर में अपनी पहली आशा द‍िखती है, इसी ल‍िए इसकी डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई। औश्र इस मांग को माइक्रोटेक व अन्य कंपनियां पूरा नहीं कर पा रही हैं, बस इसी का फायदा चीनी कंपन‍ियां उठा रही हैं। जरूरतमंद तीमारदार भी ऑक्सीमीटर खरीद रहे हैं, ब‍िना ये सोचे समझे क‍ि वह भारत में बना है या चीन में। इधर चाइनीज प्रोडक्ट का ज्यादा विकल्प न मिलने की वजह एक बार फिर से बाजार में इनकी बिक्री तेज हो गई है।

सर्जिकल आइटम में चाइनीज कंपनियों की ज्यादा पैठ है। तमाम प्रतिबंध होने की वजह से एवं  मांग को पूरा करने के लिए आयातकों और चीन की कंपनियों ने  सिंगापुर और ताइवान के रास्ते भारत में माल भेजना शुरू  कर दिया है।

मेडिकल स्टोर पर मिलने वाले सर्जिकल प्रोडक्ट में अभी भी चाइनीज कंपनियों का ही कब्जा है। ऑक्सीमीटर, हैंड ग्लब्स, बीपी मशीन, पैथोलॉजी किट समेत तमाम मेडिकल उपकरण पर अब भी चाइना पर भी निर्भरता  है।  कोई विकल्प न होने की वजह से मजबूरी में लोगों इन चाइनीज उपकरण को खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

दो से ढाई हजार रुपये में भी नहीं मिल पा रहे ऑक्सीमीटर
मौजूदा कोविड-19 संकट से जिले में ऑक्सीमीटर की भारी कमी हो गई है, इससे उपभोक्ताओं के लिए शायद ही कोई विकल्प बचा हो। चीन में निर्मित ऑक्सीमीटर की ही सप्लाई हो पा रही है। 400 से 500 रुपये में मिलने वाला ऑक्सीमीटर अब दो से ढाई हजार रुपये में भी मुश्किल से मिल पा रहा है। हर रोज दुकान पर ग्राहक ऑक्सीमीटर के लिए आते हैं, लेकिन माल न होने की वजह से उन्हें मायूस ही लौटना पड़ रहा है।

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीमीटर की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई। माइक्रोटेक समेत तमाम कंपनियां मांग के अनुरूप इसकी सप्लाई नहीं कर पा रही है। खरीदने वाले भी इस बात की परवाह नहीं करते कि ऑक्सीमीटर भारत निर्मित है या चीन निर्मित। अधिकांश लोगों का यही सोचना है कि उन्हें किसी तरह से ऑक्सीमीटर मिल जाए।

– एजेंसी

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