चीन की धमकी, ऑस्ट्रेलिया अपना फैसला वापस ले अन्‍यथा करारा जवाब मिलेगा

बीजिंग। ‘बेल्ट एंड रोड’ परियोजना से जुड़े दो समझौतों को ऑस्ट्रेलिया के रद्द करने के बाद चीन ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया शीत युद्ध की मानसिकता और वैचारिक पक्षपात को छोड़ दे और इस फ़ैसले को वापस ले अन्यथा करारा जवाब दिया जाएगा.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग की एक पहल है जो व्यापक परामर्श, संयुक्त योगदान और साझा लाभ के सिद्धांतों का पालन करती है और यह उदारता, समावेशिता और पारदर्शिता की भावना को बढ़ाती है.
उन्होंने कहा, “विक्टोरिया प्रांत का चीन के साथ सहयोगा का फ़ैसला BRI ढांचे के तहत था, जो दोनों तरफ़ के लोगों को लाभ देता, यह अच्छी पहल है. यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो सकती थी. विक्टोरिया सरकार और चीन के बीच BRI सहयोग समझौते को ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार का वीटो के ज़रिए रद्द करना दोनों देशों के बीच साझा सहयोग और सामान्य आदान-प्रदान में बेतुके तरीक़े से ख़लल डालना है और द्विपक्षीय संबंधों और आपसी विश्वास को कम आंकना है.”
चीन ने कहा है कि वह इस मामले पर आगे प्रतिक्रिया देने का अधिकार रखता है.
वांग वेंबिन ने कहा, “हम ऑस्ट्रेलिया से आग्रह करते हैं कि वह शीत युद्ध की मानसिकता और वैचारिक पक्षपात को छोड़ते हुए द्विपक्षीय सहयोग को निष्पक्ष और तर्कों की रोशनी में देखे, ग़लतियों को तुरंत सुधारे और परिवर्तन करे, आगे ग़लत रास्ते पर जाने से बचे और पहले से गंभीर हो चुके चीन-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को और गंभीर होने से बचाए.”
‘ऑस्ट्रेलिया फ़ैसला वापल ले वरना चीन करारा जवाब देगा’
प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान उनसे यह सवाल भी पूछा गया कि ऑस्ट्रेलिया ने इस समझौते को रद्द करने के लिए विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया है, इस पर चीन का क्या कहना है?
जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेंबिन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने चार समझौतों को रद्द किया है जिनमें से दो चीन से जुड़े हैं, इसलिए किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए यह फ़ैसला नहीं लिया गया है.
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने सामान्य आदान-प्रदान और साझा सहयोग को काफ़ी बाधित किया है और आपसी विश्वास को कमज़ोर किया है.
“ऑस्ट्रेलिया कहता है कि चीन के साथ सहयोग और उच्च स्तरीय वार्ता मज़बूत करने की उसे आशा है, हालांकि उसने उसके बिल्कुल उलट काम किया है. ऑस्ट्रेलियाई पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रहा है. इस बार यह सबूत है कि ऑस्ट्रेलिया में संबंध सुधारने को लेकर बुनियादी ईमानदारी का आभाव है.”
“हम ऑस्ट्रेलिया से एक बार फिर आग्रह करते हैं कि वह ग़लत फ़ैसले को पलट दे और सही रास्ता तुरंत अपनाए, ग़ैर ज़िम्मेदाराना हरकत तुरंत बंद करे और दोनों देशों के बीच साझा सहयोग और आदान-प्रदान पर कोई निराधार प्रतिबंध लगाने से बचे अन्यथा चीन पूरी तरह से करारा जवाब देगा.”
क्या होगा असर?
चीन बार-बार कहता रहा है कि BRI राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विदेश नीति का केंद्रीय बिंदु है और इसका प्राथमिक उद्देश्य इन्फ़्रास्ट्रक्चर और व्यापार को बढ़ाना है.
हालांकि, कुछ पश्चिमी देशों को डर है कि यह विकासशील देशों में चीन का राजनीतिक प्रभुत्व बढ़ाने और वैश्विक सैन्य शक्ति को विस्तार देने का साधन है.
लॉवी इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक में विश्लेषक रिचर्ड मैकग्रेगर ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स अख़बार से कहा है कि ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार ने जब इस सौदे की समीक्षा का फ़ैसला किया तो यह तय था की BRI समझौता रद्द होगा.
वो कहते हैं, “मुझे नहीं लगता है कि यह समझौता सीधे तौर पर हुआ था क्योंकि चीन एक विदेशी सरकार को एक प्रांत के साथ मुक्त समझौता करने की अनुमति कभी नहीं देगा.”
“लेकिन जिस तरह से यह मामला सामने आया है यह घरेलू राजनीति में मुद्दा बन गया है जबकि ऑस्ट्रेलिया इस समझौते को धीरे-धीरे समाप्त करने की अनुमति दे सकता था.”
ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच पहले से ख़राब चल रहे रिश्तों में हालिया घटना ने और तल्ख़ी ला दी है.
चीन, ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच 2019 में 195 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था लेकिन बीते तीन सालों में रिश्ते बेहद ख़राब हुए हैं.
इसकी शुरुआत साल 2018 में तब हुई थी जब ऑस्ट्रेलिया ने चीनी कंपनी ख़्वावे के 5जी नेटवर्क पर प्रतिबंध लगा दिया था और ऐसा करने वाला वह पहला देश था.
इसके बाद पिछले साल रिश्ते तब और ख़राब हो गए जब ऑस्ट्रेलिया ने विश्व समुदाय से कोविड-19 के लिए चीन की स्वतंत्र रूप से जांच करने को कहा था.
ऑस्ट्रेलिया ने आख़िर क्या किया?
ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को चीन के साथ उसकी महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड’ परियोजना से जुड़े दो समझौतों को रद्द कर दिया था.
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चार समझौतों को रद्द करने की घोषणा की था लेकिन उसमें बेल्ट एंड रोड परियोजना के दो समझौतों की ख़ासी चर्चा है.
दिलचस्प यह है कि यह दो समझौते ऑस्ट्रेलिया ने न करके उसके विक्टोरिया प्रांत ने 2018 और 2019 में चीन के साथ किए थे.
ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार को दिसंबर में यह वीटो पावर दी गई थी कि वह किसी प्रांत या विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए फ़ैसले को रद्द कर सकती है.
विदेश मंत्री पेन ने एक बयान जारी किया था, जिसमें इसका कारण विदेश नीति बताया था.
उन्होंने कहा था, “मैं इन चार समझौतों को ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति या हमारे विदेशी संबंधों के प्रतिकूल मानती हूँ.”
गुरुवार को विदेश मंत्री पेन ने एक बार फिर इस फ़ैसले पर सफ़ाई देते हुए कहा कि यह फ़ैसला विदेशी संबंधों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है, इसका निशाना कोई देश नहीं है.
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया चीन के साथ संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध है और ‘दुनिया में हर कहीं की सरकार से हमारा निवेदन है कि वे हमारी सरकार के फ़ैसले लेने वाले प्राधिकरण का सम्मान करें.’
-BBC

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