तनाव के बीच चीन बोला, भारत के साथ मुद्दों को हल करने के लिए उचित तंत्र उपलब्‍ध

पेइचिंग। चीन से फैले कोरोना संक्रमण के कारण पूरी दुनिया परेशान है लेकिन ड्रैगन अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए अलग ही गेम खेल रहा है। भारत से लगती सीमा पर सैन्य झड़पों के बाद चीन ने न केवल अपने सैनिकों को बड़ी संख्या में सीमा के पास तैनात कर दिया है बल्कि अब शांतिदूत बनकर तनाव को स्थिर बता रहा है।
अब चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के साथ सीमा पर हालात पूरी तरह स्थिर और नियंत्रण-योग्य हैं। दोनों देशों के पास बातचीत और विचार-विमर्श करके मुद्दों को हल करने के लिए उचित तंत्र और संचार माध्यम भी उपलब्ध हैं।
सीमा पर गतिरोध पर चीनी विदेश मंत्रालय ने यह कहा
वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच चल रहे गतिरोध की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने झाओ लिजिआन ने कहा कि सीमा से संबंधित मुद्दों पर चीन का रुख स्पष्ट और सुसंगत है। हम दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति और दोनों देशों के बीच हुए समझौते का सख्ती से पालन करते रहे हैं। बता दें कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो अनौपचारिक बैठकों के बाद उनके उन निर्देशों का जिक्र कर रहे थे जिनमें उन्होंने दोनों देशों की सेनाओं को परस्पर विश्वास पैदा करने के और कदम उठाने के लिए कहा था।
भारत के निर्माण कार्य पर आपत्ति जताने से हुआ तनाव
ताजा तनाव तब शुरू हुआ जब चीन ने भारतीय सीमा में चल रहे निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई। हालांकि, भारतीय सेना ने बताया कि पेंगोंग में अब संघर्ष जैसी स्थिति नहीं है और वहां ज्यादा सैनिक भी नहीं हैं। शुक्रवार को भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरावणे ने 14 कॉर्प्स के लेह स्थित मुख्यालय का दौरा किया और एलएसी पर सुरक्षा बलों की तैनाती का जायजा लिया। उन्होंने नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी और 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह एवं अन्य अधिकारियों के साथ मीटिंग की और एलएसी के पास के जमीनी हालात से वाकिफ हुए।
लद्दाख में धड़ाधड़ सड़क निर्माण से बौखलाया हुआ है चीन
लद्दाख में कुछ ऐसा ही हुआ है, जो चीन को खल रहा है। वहां सालभर पहले एक सड़क बनकर पूरी हुई है। यह काम बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण हालात में संपन्न हुआ। यही वजह है कि लद्दाख में चीन की छटपटाहट लगातार सामने आ रही है। पिछले दिनों भी सिक्किम और लद्दाख में चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों से उलझ पड़े थे। जानकार मानते हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर इस तरह की घटनाएं आगे भी सामने आ सकती हैं।
सालभर पहले बनी सड़क ने बढ़ाई चीन की परेशानी
दरअसल, लद्दाख में निर्मित दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड मैदानी इलाका देपसांग और गलवान घाटी तक पहुंचता है। इसे सीमा सड़क संगठन (BRO) ने बनाया है। बीआरओ भारत सरकार की वह एजेंसी है जो अपने देश के साथ-साथ पड़ोसी मित्र देशों के सीमाई इलाकों में रोड नेटवर्क तैयार करती है। इसी संगठन ने ठीक एक वर्ष पहले दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड का काम पूरा कर दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर नजर रखने वाले नितिन गोखले ने ट्वीट के जरिए लद्दाख में भारत की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी है।
-एजेंसियां

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