मसूद पर मुश्‍किल में चीन: चौतरफा घिरा, ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा… हम इंतजार कर रहे हैं

पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आतंकी संगठन के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करन का मामला जोर पकड़ रहा है। शुक्रवार को ब्रिटिश हाई कमिश्नर डोमिनिक ऐसक्वीथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यूके इसे लेकर आशावान है और उन्हें उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘हम इंतजार कर रहे हैं लंबे समय से इस प्रतिबंध का विरोध करने वाले देश इस पर क्या फैसला लेते हैं, हम एक दशक से मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।’
सीनियर यूके अधिकारी अलाइस वेल्स इस हफ्ते मसूद को प्रतिबंधित करने संबंधित एक बैठक के सिलसिले में दिल्ली में थे। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि ब्रिटेन, चीन से अपना विरोध हटाने की मांग कर रहा है। यूएन में अधिकारी मसूद पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव की भाषा को और बेहतर कर रहे हैं। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कोई निश्चित तारीख नहीं है, इस प्रस्ताव को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका लेकर आए हैं। इन देशों की मांग है कि चीन इस प्रस्ताव पर अपने रुख में बदलाव करें।
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि चीन नहीं चाहता है कि वह आतंकी का समर्थन करता दिखे, और वह मसूद पर प्रतिबंध भी नहीं चाहता है। पिछले हफ्ते भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने चीन से इस सिलसिले में बात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया, ‘हमले मसूद अजहर और जैश के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के सबूत चीन को सौंपे हैं।’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘अब मसूद को प्रतिबंधित करने का फैसला 1267 प्रतिबंध कमेटी और यूएन की दूसरी इकाई को लेना है। भारत हमेशा यह प्रयास करता रहेगा कि हमारे देश के नागरिकों पर इस तरह का हमला करने वाले आतंकी संगठन के सरगना को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाए।’
पाकिस्तान मसूद को इस लिस्ट से बाहर रखने के लिए पूरी तरह चीन के वीटो पर निर्भर है। ऐसी भी खबरें हैं कि यदि चीन मसूद के खिलाफ प्रतिबंध को अनुमति देता है तो पाकिस्तान में सीपीईसी में पर काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि सीपीईसी के लिए काम करने वाले चीनी नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पाक आर्मी ने ली है।
-एजेंसियां

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