माता-पिता के व्‍यवहार से ही बच्‍चों को मिलती है व्‍यावहारिक सीख

अगर बचपन में आप बच्चे को बेड पर अकेला और रोता हुआ छोड़कर अपने दूसरे कामों में व्यस्त रहते हैं तो बड़े होने पर आप उसे उसके बुरे बर्ताव के लिए ब्लेम नहीं कर सकते। क्योंकि उसके इस व्यवहार की वजह उसके अंदर आई वो अकेलेपन जैसी भावना होती है।
माता-पिता अपने बच्चे को अच्छा इंसान बनाना चाहते हैं। उसे अच्छी तरह व्यवहार करना, उठना, बैठना और बात करना सिखाते हैं। बच्चों को सिखाया जाता है कि बड़ों के साथ कैसे बर्ताव करें लेकिन बच्चे यह सब सीखने के साथ ही और भी बहुत कुछ सीख रहे होते हैं।
बोलते नहीं पर सब समझते हैं
कई चाइल्ड स्टडीज में यह बात सामने आई है कि बच्चे बहुत फास्ट लर्नर होते हैं। जब वे बोलना भी नहीं सीखते हैं, तब भी वे चीजें ऑब्जर्व करते हैं और अपने बड़ों को कॉपी करने की कोशिश करते हैं। आप अपने बच्चे को जो सब सिखाने का प्रयास कर रहे हैं, वो उन सब चीजों को सीखने के साथ ही वह सब भी सीख रहा होता है, जो आप उसे नहीं सिखा रहे होते हैं।
पेरेंट्स का अच्छा व्यवहार तो बच्चे का भी
एक स्टडी के मुताबिक ज्यादातर केसेज में यह बात सामने आई कि जिन माता-पिता का व्यवहार अच्छा होता है, उनके बच्चों का व्यवहार भी अच्छा होता है। बच्चों को जो सिखाया जाता है, बच्चे उससे ज्यादा वह सब सीखते हैं जो उनके चारों तरफ उनकी आंखों के सामने हो रहा होता है।
आपको करना होगा ऐसा
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा समय पर सो जाए और समय पर उठ जाए। वह समय पर खाना खाए और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे तो आपको यह सब पहले खुद करना होगा। आप अपना रूटीन सेट करेंगे तो आपको देखकर उतना छोटा बच्चा भी फॉलो करने की कोशिश करता है, जो अपनी बात साफ-साफ बोल नहीं पाता। अगर बचपन में आप बच्चे को बेड पर अकेला और रोता हुआ छोड़कर अपने दूसरे कामों में व्यस्त रहते हैं तो बड़े होने पर आप उसे उसके बुरे बर्ताव के लिए ब्लेम नहीं कर सकते। क्योंकि उसके इस व्यवहार की वजह उसके अंदर आई वो अकेलेपन जैसी भावना होती है। जो उसने बेड पर अकेले रोते हुए अनुभव की, वह बोल नहीं पाएगा लेकिन उसकी मेमोरीज में ये भाव जमा होते जाएंगे।
-एजेंसियां

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