मुख्‍यमंत्री ने गैरसैंण को उत्तराखंड की समर कैपिटल घोषित किया

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने गैरसैंण को राज्य की समर कैपिटल (ग्रीष्मकालीन राजधानी) घोषित कर दिया है। मार्च में गैरसैंण में ही आयोजित बजट सत्र के दूसरे दिन बजट भाषण के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका ऐलान किया था। सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
बताते चलें कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही यह मांग बुलंद हो रही थी कि पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ में ही हो। आंदोलनकारियों के साथ-साथ कई संगठन और राजनीतिक दल भी समय-समय पर गैरसैंण को प्रदेश की राजधानी बनाने की मांग उठाते रहे हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को समर कैपिटल बनाए जाने को राज्य आंदोलनकारियों और प्रदेश की माताओं-बहनों को समर्पित किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था, ‘यह गर्व का पल है। यह एक बहुत बड़ा फैसला है। मैं रात भर सो नहीं पाया और काफी सोच-विचार कर यह फैसला किया है। हमने 2017 के घोषणा पत्र में किए गए वायदे को पूरा किया है।’
‘गैरसैंण का नए सिरे से होगा विकास, पानी के लिए झील बनाने पर काम जारी’
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार उत्तराखण्ड एक सीमांत राज्य होने के कारण सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण और आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। इन्ही बातों और प्रदेश की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यहां तमाम आवश्यक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। गैरसैंण में पानी की समस्या को दूर करने के लिए पहले से ही झील बनाए जाने पर काम किया जा रहा है।
बजट सत्र के दौरान कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग करते रहे। बीजेपी की सरकार ने इसे समर कैपिटल बनाने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद इसे लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी के अनुसार, यह गैरसैंण के नाम पर गैरसैंण से छल है।
लेफ्ट ने कहा था, दो राजधानियां अंग्रेजों की सोच
इंद्रेश मैखुरी ने कहा था, ‘ग्रीष्मकालीन-शीतकालीन का खेल गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को हाशिए पर डालने की त्रिवेंद्र रावत सरकार की साजिश है। 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे हुए 13 जिलों के छोटे से प्रदेश में दो राजधानियां औचित्यहीन और जनता के धन की बर्बादी हैं। दो राजधानियां औपनिवेशिक अवधारणा है, जिसे हिंदुस्तान पर राज करने आए अंग्रेजों ने अपने ऐशो-आराम के लिए ईजाद किया था।’
-एजेंसियां

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