राम मंदिर की ज़मीन खरीद में घोटाले के आरोपों पर बोले चंपत राय

अयोध्‍या। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन में बड़े घोटाले तथा भ्रष्टाचार आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया है.
एक प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए चंपत राय ने कहा है कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जितनी ज़मीन खरीदी है, वह खुले बाज़ार की क़ीमत से बहुत कम मूल्य पर खरीदी है.
रविवार देर शाम जारी एक प्रेस वक्तव्य में चंपत राय ने कहा, “श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जितनी भूमि क्रय की है, वह खुले बाज़ार की क़ीमत से बहुत कम मूल्य पर ख़रीदी है. उक्त भूमि को ख़रीदने के लिए वर्तमान विक्रेतागणों ने वर्षों पूर्व जिस मूल्य पर अनुबंध किया था, उस भूमि को उन्होंने 18 मार्च 2021 को बैनामा कराया तत्पश्चात ट्रस्ट के साथ अनुबंध किया.”
विश्व हिन्दू परिषद ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से फ़िलहाल इंकार कर दिया है. विश्व हिन्दू संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का अभी यही जवाब है कि वो आरोप के सभी दस्तावेज़ों को देखकर उसकी सच्चाई का पता लगाएंगे.
वीएचपी के बड़े पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि संगठन ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है और यदि आरोप सही पाए गए तो इसके ख़िलाफ़ आंदोलन किया जाएगा.
गौरतलब है कि अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देख-रेख में राम मंदिर निर्माण का काम चल रहा है. निर्माण की तैयारियों की समीक्षा के लिए रविवार को ही अयोध्या में ट्रस्ट की भी बैठक थी.
ट्रस्ट पर ज़मीन घोटाले के आरोपों पर पहले तो चंपत राय ने टिप्पणी करने से साफ़ इंकार कर दिया लेकिन रविवार देर शाम उन्होंने एक प्रेस वक्तव्य जारी करके सफ़ाई दी.
सपा नेता के आरोप
दरअसल, समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय का कहना था कि “18 मार्च 2021 को क़रीब 10 मिनट पहले बैनामा भी हुआ और फिर एग्रीमेंट भी. जिस ज़मीन को दो करोड़ रुपये में ख़रीदा गया उसी ज़मीन का 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट क्यों हुआ?
एग्रीमेंट और बैनामा दोनों में ही ट्रस्टी अनिल मिश्र और मेयर ऋषिकेष उपाध्याय गवाह हैं.”
पवन पांडेय ने सवाल उठाए हैं कि महज़ कुछ मिनटों में ही 2 करोड़ रुपये की क़ीमत की ज़मीन साढ़े 18 करोड़ रुपये की कैसे हो गई?
उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर ज़मीन ख़रीदने के बहाने राम भक्तों को ठगा जा रहा है.
उन्होंने यह भी दावा किया है कि ज़मीन खरीदने का सारा खेल मेयर और ट्रस्टी को मालूम था. पवन पांडेय ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.
पवन पांडेय ने अयोध्या में मीडिया के सामने रजिस्ट्री के दस्तावेज़ पेश करते हुए कहा, “राम जन्मभूमि की ज़मीन से लगी एक ज़मीन पुजारी हरीश पाठक और उनकी पत्नी ने 18 मार्च की शाम सुल्तान अंसारी और रवि मोहन को दो करोड़ रुपये में बेची थी. वही ज़मीन कुछ मिनट बाद चंपत राय ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट की तरफ़ से 18.5 करोड़ रुपये में ख़रीद ली. मैं भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा हूं. ऐसी कौन सी वजह थी कि उस ज़मीन ने 10 मिनट के अंदर सोना उगल दिया.”
दूसरे राजनीतिक दल भी उतरे मैदान में
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राम मंदिर के नाम पर ख़रीदी जा रही ज़मीन के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.
उनका कहना था, “लगभग 5.5 लाख रुपये प्रति सेकंड ज़मीन का दाम बढ़ गया. हिंदुस्तान क्या दुनिया में कहीं कोई ज़मीन एक सेकंड में इतनी महंगी नहीं हुई होगी. मैं मांग करता हूं कि इस मामले की तत्काल ईडी और सीबीआई से जांच कराई जाए और जो भी भ्रष्टाचारी हैं उनको पकड़ कर जेल में डाला जाए.”
कांग्रेस पार्टी के विधायक दीपक सिंह ने भी राम मंदिर के लिए ख़रीदी गई ज़मीन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.
-एजेंसियां

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