IT मंत्री से दुर्व्यवहार पर केंद्र सरकार लाएगी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव

नई दिल्‍ली। राज्यसभा में ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ रिपोर्ट पर बयान पढ़ने के दौरान IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ दुर्व्यवहार करने वाले टीएमसी सांसदों के खिलाफ केंद्र सरकार विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगी। केंद्र सरकार राज्यसभा अध्‍यक्ष से टीएमसी सांसद शांतनु सेन को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए निलंबित करने का अनुरोध करेगी। टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने गुरुवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के बयान की कॉपी छीन ली, जब वह राज्यसभा में अपना भाषण दे रहे थे और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए।
राज्यसभा की कार्यवाही गुरुवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। जैसे ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ मीडिया रिपोर्ट पर बोलने के लिए उठे, विपक्षी सांसदों द्वारा सदन में हंगामे के बीच राज्यसभा को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। आईटी मंत्री के साथ दुर्व्यवहार पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और टीएमसी सांसद शांतनु सेन के बीच गरमागरम शब्दों का आदान-प्रदान हुआ।

क्या है विशेषाधिकार हनन?
देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
इस नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

किसे मिले हैं विशेषाधिकार?
भारत के लोकतंत्र में संसद के सदस्यों को जो विशेषाधिकार दिए गए हैं, उनका मूल उद्देश्य सत्ता को किसी भी रूप या तरीके से बेलगाम होने से रोकने का है. भारत ने जो संसदीय प्रणाली अपनाई है, उसमें बहुमत का शासन होता है. लेकिन, अल्पमत में रहने वाले दलों के सदस्यों को भी जनता ही चुनकर भेजती है. उनका मुख्य कार्य संसद के भीतर सरकार को जवाबदेह बनाए रखने का होता है.

-एजेंसियां

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