व‍िनीत नारायण के एनजीओ ब्रज फाउंडेशन की जांच करेगी केंद्रीय एजेंसी

नई द‍िल्ली। ब्रज फाउंडेशन के खिलाफ याचिका पर आज एनजीटी ने उत्तरप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को आदेश देते हुए कहा क‍ि केंद्रीय जांच एजेंसी से ब्रज फाउंडेशन की जांच करवाई जाए।

गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी में पीठ के न्यायाधीश रघुवेंद्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गब्रियाल ने ब्रज फाउंडेशन के खिलाफ यह आदेश द‍िया।

50 पन्नों का यह आदेश याचिकाकर्ता आनंद गोपाल दास की ओर से अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी व राहुल शुक्ला द्वारा ब्रज फाउंडेशन के खिलाफ ठोस दलीलें पेश करने पर दिया गया। अधिवक्ताओं ने ब्रज फाउंडेशन पर ब्रज में करोड़ों रुपए का घोटाला करते हुए सरकारी संपत्तियों, कुंडों आदि पर कब्ज़ा कर सरकारी पैसे का अपव्यय करके अपनी संस्था को करोड़ों का लाभ पहुंचाने के अरोप लगाए थे।

इससे पहले न्यायालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से याचिकाकर्ता की तरफ से दाखिल याचिका पर जांच कर अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से जिलाधिकारी मथुरा द्वारा एक कमेटी गठित कर ब्रज फाउंडेशन के कार्यों की जांच की गई।

जांच में ब्रज फाउंडेशन संस्था द्वारा निजी स्वार्थों के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की कई बेशकीमती जमीनों व कुंडों पर कब्जा किया गया, पाया। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए साफ कर दिया क‍ि ब्रज फाउंडेशन ने पिछली सरकारों में कई बड़े सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी संपत्तियों पर कब्जा भी किया व इसके साथ ही बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग भी किया।

एनजीटी ने अपने आदेश में यह साफ क‍िया क‍ि ब्रज फाउंडेशन द्वारा बड़े-बड़े अधिकारियों तथा न्यायालय के आदेशों को भी गलत तरीके से उपयोग कर ब्रज के पुरातत्व स्थलों तक पर कब्जा कर लिया गया।

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार के जवाब को अपने आदेश में जोड़ते हुए कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के लिए ब्रज फाउंडेशन की जांच होना बेहद जरूरी है। गिरिराज परिक्रमा संरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने अपने आदेश में कहा क‍ि ब्रज फाउंडेशन द्वारा सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार के रेवेन्यू बोर्ड के आदेशों की अवहेलना की गई। वर्ष 2008 में रेवेन्यू बोर्ड द्वारा यह साफ कर दिया गया था कि कोई भी संस्था कुंडों के सौंदर्यीकरण का कार्य नहीं करेगी फ‍िर भी पिछली सरकारों के कुछ बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत कर बड़ी-बड़ी प्राइवेट व अर्द्धसरकारी संस्थाओं का सीएसआर के पैसे का गबन किया गया जो कि जांच का बेहद बड़ा बिंदु है।

एनजीटी ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को आदेशित किया है कि इस पूरे प्रकरण की किसी केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा कराई जाए तथा एक महीने के अंदर जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। याचिकाकर्ता आनंद गोपाल दास व सत्यप्रकाश मंगल की तरफ से मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा, सार्थक चतुर्वेदी ने कहा है कि याचिकाकर्ता को केन्द्रीय जांच एजेंसी में सीबीआई पर भरोसा है।

गिरिराज परिक्रमा संरक्षण से जुड़े मुख्य मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी को अगली तारीख पर हाजिर होने के लिए निर्देशित किया है तथा उनके द्वारा दिए गए शपथ पत्र पर भी न्यायालय ने सवाल उठाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े अधिकारियों को इस तरह के गलत शपथ पत्रों को दाखिल कर न्यायालय को गुमराह नहीं करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी के लिए तय की गई है।

-Legend News

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