CDS रावत ने बताया, अब भारत में ही बने फाइटर विमान इस्तेमाल करेगी इंडियन एयर फोर्स

नई दिल्‍ली। पीएम मोदी ने इसी हफ्ते ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की बात कही है और भारत अब लोकल मेड फाइटर जेट्स बनाने की सोच रहा है जबकि दो साल पहले ही भारत ने दुनिया के सबसे बड़े वारप्लेन कॉन्ट्रैक्ट की बात की थी, जिसके तहत ग्लोबल कंपनियों से 114 लड़ाकू एयरक्राफ्ट की सप्लाई के लिए प्रपोजल देने को कहा था।
भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में हल्के लड़ाकू विमान शामिल करना चाहती है जो भारत में ही बने हों। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत ने दिल्ली में एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि तेजस जैसे एयरक्राफ्ट हमारे पुराने होते विमानों के बेड़े की क्षमता को बढ़ाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि वायुसेना अब 6 अरब डॉलर में 83 जेट खरीदेगी, जो पहले 40 एयरक्राफ्ट खरीदने वाली थी।
रावत ने कहा कि इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने कहा है कि वह भारत में ही बने फाइटर विमान इस्तेमाल करेगी। ये फैसला बोइंग, लॉकहीड मार्टिन कॉर्प और साब एबी जैसी कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है, जो 15 अरब डॉलर की डील के लिए रेस में शामिल थे। ये एक इशारा है कि भारत अब महंगे विदेशी विमानों से किनारा करने की सोच रहा है, जिनकी वजह से पैसों की दिक्कत भी होती थी।
डिफेंस एक्सपोर्टर बनेगा भारत
दिल्ली स्थित सेंटर फॉर एयरपावर स्टडीज़ के अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल मनमोहन बहादुर ने कहा, अब जब भारत में ही बने एयरक्राफ्ट को इस्तेमाल करने का फैसला कर ही लिया गया है तो रक्षा मंत्रालय को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की क्षमता बढ़ानी होगी, जो भारत में जेट बनाती है। रावत ने ये भी कहा कि अब भारत डिफेंस एक्सपोर्टर की तरह भी एक बड़ा रोल अदा करेगा, क्योंकि यहां कीमतें काफी कम हैं। जब दुनिया भारत को इन विमानों का इस्तेमाल करते देखेगी, तो बेशक ही कुछ देश इसे खरीदने में रुचि लेंगे।
फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया करीब एक दशक पहले शुरू हई थी। भारत ने 2015 में डसॉल्ट एविएशन से 11 अरब डॉलर में 126 राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने के ऑर्डर को खत्म किया था, लेकिन उसके बाद से अब तक 36 प्लेन खरीदे जा चुके हैं, ताकि एयरक्राफ्ट के पुराने विमानों की जगह नए विमान ले सकें।
दो साल पहले 114 जेट खरीदने का निकाला था टेंडर
अप्रैल 2018 में भारत ने 114 जेट खरीदने का एक ग्लोबल टेंडर निकाला था। इसके लिए बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और स्वीडन की साब एबी को अपनी ओर खींचा। दस्तावेजों के अनुसार इनमें से करीब 85 फीसदी एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन भारत में ही होना था। वैसे तो मिलिट्री पर खर्च करने के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है, लेकिन इसके एयरफोर्स, नेवी और सेना में अभी भी ऐसे हथियार हैं, जो आज के जमाने में गुजरी बातें हो चुके हैं।
-एजेंसियां

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