गुडविन जूलर्स के फरार मालिकों पर मुकदमा दर्ज

नई दिल्‍ली। निवेशकों के करोड़ों रुपये लेकर कथित तौर पर फरार होने के मामले में पुलिस ने गुडविन जूलर्स के मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश कर रही है।
पुलिस ने कहा है कि स्टोर के मालिक केरल के रहने वाले हैं और अपने परिवार के साथ फरार हैं। दोनों मालिकों सुनील तथा सुधीश के मुंबई तथा पुणे में कम से कम 13 आउटलेट हैं। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी गुडविन ग्रुप की वेबसाइट के मुताबिक सुनील कुमार कंपनी के चेयरमैन हैं जबकि सुधीश कुमार प्रबंध निदेशक हैं।
क्या है मामला?
पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (PMC) बैंक घोटाले के बाद महाराष्ट्र में एक और बड़े घोटाले का अंदेशा जताया जा रहा है। प्रदेश में एक जूलरी स्टोर के बंद होने के बाद हजारों लोगों की हालत खराब है।
दरअसल, इन लोगों ने इस स्टोर की फिक्स्ड डिपॉजिट तथा गोल्ड स्कीमों में भारी-भरकम निवेश कर रखे हैं लेकिन स्टोर के मालिक पिछले कई दिनों से अपनी दुकानें बंद कर फरार हैं। जब पुलिस जूलरी स्टोर गुडविन स्टोर्स के मालिकों सुनील कुमार तथा सुधीश कुमार के डोंबिवली स्थित आवास पर पहुंची तो उसे बंद पाया, जिसके बाद इसी इलाके में स्थित उनके शोरूम को सील कर दिया।
करोड़ों का हुआ है निवेश
लोगों का दावा है कि उन्होंने गुडविन की स्कीमों में 2,000 रुपये से लेकर 50 लाख रुपये से ऊपर का निवेश कर रखा है। लेकिन पुलिस का मानना है कि यह रकम करोड़ों में हो सकती है। रामनगर पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर एसपी अहेर ने बताया, ‘हमने स्टोर्स के मालिकों और उनके एरिया मैनेजर मनीष कुंडी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है और इसकी जांच की जा रही है।’
उन्होंने कहा कि अब तक केवल डोंबिवली के लगभग 250 लोगों ने उनसे संपर्क किया है और जमा हुई कुल रकम का पता लगाने के लिए उनके बयान दर्ज किए गए हैं। जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उनका मोबाइल फोन स्वीच्ड ऑफ मिला।
कंपनी की दो स्कीमें
1. पहली स्कीम में फिक्स्ड डिपॉजिट पर 16% इंट्रेस्ट की पेशकश की गई थी।
2. दूसरी स्कीम में डिपॉजिट के एक साल पूरे होने पर गोल्ड जूलरी देने की पेशकश की गई थी। कोई निवेशक एक साल के लिए एक महीने में चाहे कितनी भी रकम का निवेश कर सकता था। निवेशक अपनी रकम के बराबर गोल्ड ले सकता था या कैश चाहने वालों को 14 महीने के लिए इंतजार करना पड़ता था।
गुडविन ग्रुप का इन्वेस्टमेंट्स
गुडविन ग्रुप ने जूलरी, कंस्ट्रक्शन, सिक्यॉरिटी डिवाइसेज तथा आयात-निर्देश में निवेश कर रखा है। 1992 में इसने केरल में जूलरी बनाना शुरू किया और अगले तीन साल में यह जूलरी का होलसेल कारोबार करने लगा। साल 2004 में यह मुंबई के बाजार में उतरा।
इसकी शाखाएं
कंपनी की शाखाएं वाशी, ठाणे, डोंबिवली में दो, चेंबूर, वसई, अंबरनाथ, पुणे में तीन तथा केरल में हैं। इसने विदेश में भी शोरूम खोलने वाला था।
गुडविन के मालिक का परिवार
कंपनी के प्रमोटर्स केरल के त्रिशूर के रहने वाले हैं। सुनील कुमार तथा सुधीश कुमार मुंबई की एक बड़ी जूलरी शॉप को सोने की आपूर्तिकर्ता थे। दुकान के मालिक ने कहा कि उन्होंने उनसे 1998 में कारोबार शुरू किया था और 2002 में बंद कर दिया।
निवेश जुटाने के लिए तिकड़मों का सहारा
निवेशकों का दावा है कि डोंबिवली ऑफिस 21 अक्टूबर को बंद किया गया और जब उन्होंने फोन पर स्टोर के कर्मचारियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि स्टोर दो दिन के लिए बंद रहेगा लेकिन दुकान दिवाली पर भी बंद रही, जिसके कारण चिंता बढ़ी। संदेश मुदलियार नाम के एक निवेशक ने कहा, ‘निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्टोर के मालिक दोनों भाइयों ने बॉलीवुड और केरल फिल्म इंडस्ट्री से सिलेब्रिटीज को बुलाया था।’
जमा लाने के लिए एजेंट्स की नियुक्ति
कंपनी ने जमा लाने के लिए कमिशन आधार पर एजेंट्स की नियुक्ति कर रखी थी। एक अन्य निवेशक ने कहा कि वह और उनके भाई ने कंपनी में इसलिए एक लाख रुपये निवेश किया, क्योंकि इससे एजेंट की आजीविका चलती थी। उन्होंने कहा, ‘हमारे पिता ने पांच साल पहले निवेश शुरू किया था। हमने गोल्ड स्कीम में निवेश बरकरार रखा, क्योंकि उससे होने वाली आय से एजेंट की आजीविका चलती थी।’ खबर फैलते ही ठाणे के शोरूम के बाहर भी लोगों का जुटना शुरू हो गया। एक और निवेशक अनुया मिसाल ने कहा, ‘मैंने तीन लाख रुपये का निवेश किया था और स्वास्थ्य पर भविष्य में होने वाले खर्च के लिए बचत कर रहे थे।’
-एजेंसियां

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