द‍िल्ली में free travel की योजना को बसों ने लगाया पलीता

नई द‍िल्ली। द‍िल्ली में free travel की योजना को बसों ने पलीता लगा द‍िया, बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की शुरुआत महज कुछ घंटों बाद ही दम तोड़ती नजर आई क्योंक‍ि बस स्टॉप पर महिला यात्रियों की भारी भीड़ से बचने के लिए बसों के गंतव्य और नंबर को सामने की स्क्रीन से हटा दिया।

केंद्रीय टर्मिनल से दोपहर में नई दिल्ली और यमुना पार के लिए जाने वाली बसों का करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस वजह से स्कूल से छुट्टी होने के बाद छात्र-छात्राओं के घर पहुंचने में देरी हुई तो शिक्षकों के लिए भी मुफ्त सफर परेशानी का सबब बनता नजर आया। हालांकि, सीएम ने बसों में सफर कर इस पहल पर यात्रियों से खूब तारीफें बटोरी।

डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिला यात्रियों के लिए मुफ्त सफर की शुरुआत कर दी गई, लेकिन न तो माकूल संख्या में बसें मुहैया की गई हैं और न ही यात्रियों को पहले की तरह सुविधा। बुधवार को भी सड़कों पर चलने वाली बसों में दोपहर के वक्त काफी भीड़ रही। ‘अमर उजाला’ संवाददाता ने जब केंद्रीय टर्मिनल से इन रूटों पर चलने वाली बसों से यात्रियों को मिल रही सुविधाओं की हकीकत जानने की कोशिश की तो स्टॉप पर बसों का इंतजार कर रहे यात्री ही नजर आए।

एक घंटे तक बसों का इंतजार कर रही महिला यात्रियों ने इस सुविधा की शुरुआत पर नाराजगी जताई। छात्राएं इसलिए खुश थी कि उन्हें मुफ्त सफर का मौका मिल गया है, लेकिन एक घंटे तक इंतजार के कारण घरों तक पहुंचने में हुई देरी से बच्चियां भी परेशान दिखीं।

50 मिनट से भी अधिक वक्त तक गुरुद्वारा बंगला साहिब और एनडीपीओ के स्टॉप पर बसों का इंतजार कर रही महिला यात्रियों ने मुफ्त सफर की सुविधा पर सवाल खड़े कर दिए। बस संख्या 740 का इंतजार कर रही रानी ने बताया कि 40 मिनट से अधिक वक्त से इंतजार कर रही हैं, लेकिन बसों के न रुकने की वजह से उन्हें घर पहुंचने में देरी हुई।

लता ने बताया कि अगर मुफ्त सफर की शुरुआत के बाद बसों के आगे लिखे रूट नंबर ही न लिखे हो और बसें न रुके तो इस स्कीम का क्या फायदा। उन्होंने कहा कि 50 मिनट से अधिक इंतजार के बाद भी बसों के रुकने का इंतजार कर रही हैं। कुछ क्लस्टर बसें रुकीं भी तो वह दूसरे रूट की थीं। रूबी ने कहा कि मार्शल की सुविधा शुरू की गई है, यह महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।

छात्राओं ने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से खर्च की बचत होगी, लेकिन इतनी देर तक कभी भी इंतजार नहीं करना पड़ा। पहले भी छात्र-छात्राओं की अधिक संख्या होने की वजह से विद्यार्थियों को परेशानियां होती थी, लेकिन बसें स्टॉप पर रुकती थीं। बसों में तैनात अधिकतर मार्शल पर अपनी सीट पर डटे रहे, जबकि भीड़ भरी कई बसों में खड़े यात्रियों को जगह देने की जहमत नहीं उठाई।

– एजेंसी

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