मुल्‍ला नसरुद्दीन की भैंस दौड़

सोचिए और फिर बताइए कि तमाम सोच-विचार के बाद जिन कामों को हम करते हैं, वही काम मूर्खतापूर्ण साबित क्‍यों होते हैं। फिर चाहे वह प्रेम विवाह ही क्‍यों न हो।
मुल्‍ला नसरुद्दीन के पास एक ऐसी भैंस थी जिसके सींग बड़े घुमावदार और सुंदर थे।
उन सींगों को देखकर मुल्‍ला के मन में हमेशा यह विचार आता था कि कैसा हो यदि मैं इन सींगों के बीच में बैठ सकूं, और फिर पूरे शहर में घूमूं।
कई वर्षों तक यह विचार मुल्‍ला के मन में घुमड़ता रहा, फिर एक दिन ऐसा भी आया जब मुल्‍ला के लिए स्‍वयं को रोक पाना मुश्‍किल हो गया।
मुल्‍ला जा बैठा भैंस के उन घुमावदार सींगों के बीच। मुल्‍ला के बैठते ही भैंस चौकड़ी भरती हुई तेजी से भाग खड़ी हुई।
कुछ देर तक तो मुल्‍ला ने जैसे-तैसे खुद को संभाला किंतु आखिर में जा पड़ा सड़क पर चारों खाने चित्त।
मुल्‍ला को बीच सड़क पर पड़े कराहते हुए देखकर लोग इकठ्ठा हो गए और पूछने लगे- मुल्‍ला ये क्‍या पागलपन था। ऐसा करने से पहले तुमने क्‍या एकबार भी नहीं सोचा ?
इस पर मुल्‍ला का जवाब था- आप ऐसा कैसे कह सकते हैं कि मैंने सोचा नहीं। मैंने तो कई वर्षों तक गंभीरता पूर्वक सोचने के बाद ही यह कदम उठाया था।