भारत के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने पाक के विदेश मंत्री के साथ मीटिंग रद्द की

लंदन। पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी व हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के बीच हुई बातचीत को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले काफी दिनों से तनाव का माहौल है।
भारत के कड़े विरोध के बाद ब्रिटिश सरकार ने कुरैशी के साथ होने वाली आधिकारिक मीटिंग को रद्द कर दिया है। गौर करने वाली बात है कि अपने आगामी लंदन दौरे में कुरैशी ‘कश्मीर पर’ एक विवादास्पद कॉन्फ्रेन्स और प्रदर्शनी रखने वाले हैं।
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें जानकारी है कि कुरैशी कुछ निजी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए लंदन आ रहे हैं। ब्रिटेन सरकार के साथ के साथ उनकी मुलाकात की कोई योजना नहीं है और न ही वह सरकार के अतिथि हैं।’
बता दें कि कुरैशी सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में होने वाली ‘कश्मीर से जु़ड़े मुद्दों पर’ एक कॉन्फ्रेन्स में हिस्सा लेंगे। इस कॉन्फ्रेन्स में ब्रिटेन के सांसद भी शामिल होंगे। मंगलवार को ‘कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन’ प्रदर्शनी का आयोजन होगा। भारत सरकार के विरोध के बावजूद ब्रिटेन में ये दोनों कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के एक प्रवक्ता ने बताया, ‘पाकिस्तान के विदेश मंत्री सोमवार को कश्मीर पर होने वाली कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे और मंगलवार को इंटरनेशनल होटल पार्क लेन में कश्मीर पर आयोजित की जाने वाली एक प्रदर्शनी का हिस्सा बनेंगे।’
बता दें कि इन कार्यक्रमों को ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के साथ मिलकर आयोजित किया जा रहा है और इनमें सिर्फ इनवाइट के साथ ही हिस्सा लिया जा सकता है।
हाई कमीशन ने इवेंट से जुड़ी कोई और जानकारी देने से मना कर दिया। ब्रिटेन सरकार के साथ मीटिंग को लेकर भी हाई कमीशन ने किसी तरह की पुष्टि नहीं की। पाकिस्तान पर APPG के चेयरपर्सन और मेंबर स्टाफ के तौर पर काम कर रहे रहमान चिश्ती एमपी ने कहा, ‘मुझे बताया गया है कि इस इवेंट से जु़ड़ी सभी जानकारी पाकिस्तान हाई कमीशन से की जाए।’
एक सूत्र ने बताया, ‘पाक विदेश मंत्री और ब्रिटिश सरकार के बीच कुछ मीटिंग की योजना बनाई गई थी लेकिन भारत के विरोध के चलते इन्हें रद्द कर दिया गया।’
पिछले सप्ताह ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था, ‘हमने ब्रिटेश को कड़े शब्दों में अपना रूख बता दिया है कि उनके क्षेत्राधिकार और देश में भारत-विरोधी रैली और कॉन्फ्रेन्स नहीं होने चाहिए। हमें उम्मीद है कि ब्रिटिश सरकार इस पर गंभीरता के साथ विचार करेगी और ऐसी कोई कॉन्फ्रेन्स होने पर वह इसके खिलाफ कार्रवाई करेगी।’
हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने इन दोनों ही इवेंट की इजाजत दे दी है। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘यूके चाहता है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर की स्थिति को लेकर एक स्थाई राजनीतिक हल खोजें। कश्मीर और वहां के लोगों की इच्छा के हिसाब से जिम्मेदारी लें। सांसद स्वतंत्र हैं कि व खुद यह फैसला लें कि वे किससे मिलना चाहते हैं और किससे नहीं। यह उन पर है कि वे किस उद्देश्य से किसी से मुलाकात कर रहे हैं।’
-एजेंसियां

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