हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है ब्रेस्ट फीडिंग वीक

1 से 7 अगस्त तक हर साल ब्रेस्ट फीडिंग वीक मनाया जाता है इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं ब्रेस्ट फीडिंग के दूसरे फायदों के बारे में…
दादी-नानी के जमाने से ही यह कहा जाता रहा है कि बच्चे के लिए मां का दूध अमृत समान होता है। सिर्फ मान्यताएं ही नहीं हैं बल्कि साइंस ने कई स्टडीज के बाद भी यह साबित कर दिया है कि मां के दूध में फैट, शुगर, पानी और प्रोटीन की सही क्वॉन्टिटी होती है, जो बच्चे की अच्छी हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है।
टेंशन फ्री मॉम
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अजय कहते हैं कि ब्रेस्ट फीडिंग करने वाली महिला कई तरह की बीमारियों जैसे हार्ट प्रॉब्लम, डायबीटीज, ऑस्टियोपोरोसिस से बच सकती है।
यही नहीं, ब्रेस्टफीडिंग के जरिए ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। डिप्रेशन को दूर करने में भी यह प्रोसेस बेहद कारगर है। बकौल अजय, ब्रेस्टफीडिंग करवाते समय महिलाओं की बॉडी से एक हॉर्मोन ऑक्सिटोसिन निकलता है, जिससे वे टेंशन फ्री रहती हैं और अच्छा फील करती हैं।
फिगर रहेगा मेंटेन
आप जितनी ज्यादा ब्रेस्ट फीडिंग कराएंगी, उतनी अधिक कैलरीज बर्न होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रेस्ट फीड कराने में कम से कम 20 कैलरी एक बार में कम हो जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ने वाले वेट को कम करने में भी ब्रेस्ट फीड बेहद काम आती है।
​स्ट्रान्ग बॉन्डिंग
माना जाता है कि बच्चा पूरे जीवन भर पिता से ज्यादा मां के नजदीक इसलिए होता है क्योंकि मां बच्चे को अपना दूध पिलाकर बड़ा करती है। यही चीज उनके बीच स्ट्रॉग बॉन्डिंग बनाती है। स्टडीज के बाद यह भी पता चला है कि अगर मां बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाती तो उन के बीच अपनापन का खासा भाव नहीं आ पाता।
बच्चे की इम्युनिटी स्ट्रॉन्ग
– बच्चे के बीमार होने पर उसकी बॉडी को लड़ने की पावर देता है मां का दूध। इससे बच्चे की इम्युनिटी स्ट्रॉन्ग होती है, जो बड़े होने तक उसका साथ निभाती है।
– बच्चे के पैदा होने के बाद कोलोस्ट्रम यानी मां के ब्रेस्ट में बनने वाला पहला दूध बच्चे को डायरिया, चेस्ट इंफेक्शन और दूसरी कई बीमारियों से बचाता है।
​बच्चे का ब्रेन करता है तेज
मां का दूध बच्चे के ब्रेन को ऐक्टिव रहता है। 17,000 नवजातों पर एक सर्वे कराया गया था जिसमें जन्म से लेकर 6.5 साल तक उन पर अध्ययन किया गया। इस स्टडी में पाया गया कि ब्रेस्ट फीडिंग बच्चे के बौद्धिक विकास पर गहरा असर डालती है। स्तनपान कराने से बच्चे की सूझबूझ का स्तर बढ़ता है। मां और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होने से जहां ब्रेन पावर बढ़ती है वहीं ब्रेस्ट फीड में मौजूद फैटी एसिड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
​बच्चे को मोटापे से बचाता है
स्तनपान से बच्चे को मोटापे का खतरा कम हो जाता है। 17 स्टडीज के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि बच्चे को स्तनपान कराने से युवावस्था में मोटापे का रिस्क कम हो जाता है। यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि जिन बच्चों को लंबे समय तक मां का दूध पिलाया गया, उनके मोटापे से ग्रस्त होने की संभावना उतनी ही कम थी।
कई तरह के कैंसर से बचाव
ऐसी कई स्टडीज हुई हैं जो बताती हैं कि जितना लंबे समय तक महिलाएं बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उतना ज्यादा वे ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्राप्त करती हैं।
-एजेंसियां

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