दार्शनिक और कुशल राजनीतिज्ञ थीं महारानी अहिल्याबाई होल्कर

आज 31 मई को महारानी अहिल्याबाई होल्कर की 295 वीं जयंती है. महारानी अहिल्याबाई होल्कर का नाम भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ योद्धा रानियों में शुमार है. उनके शासनकाल के दौरान मराठा मालवा साम्राज्य ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ. अहिल्याबाई होल्कर ने देशभर में कई हिंदू मंदिरों और धर्मशालाओं का निर्माण करवाया.

महारानी अहिल्या बाई होल्कर का जन्म 31 मई, 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी (वर्तमान अहमदनगर) गांव में हुआ था. अहिल्याबाई होल्कर अच्छी तरह से शिक्षित महिला थीं. जब वह 8 साल की थीं, तब उन्हें मल्हार राव होलकर (मराठा पेशवा बालाजी बाजी राव के सेना प्रमुख) देखने आए थे. इसके बाद जल्द ही मल्हार राव के बेटे, खंडेराव से उनकी शादी हो गई थी.

फिल 1745 में अहिल्याबाई होल्कर ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिनका नाम पुरुष राव रखा गया. लेकिन 19 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई. 1748 में, अहिल्याबाई होल्कर ने जात-पात की व्यवस्था से ऊपर उठकर एक गरीब परिवार के बहादुर लड़के यशवंत राव से अपनी बेटी की शादी करवाई.

अहिल्याबाई होल्कर ने 1754 में पति की मृत्यु के बाद सती होने का फैसला किया लेकिन उनके ससुर ने महारानी को ऐसा करने रोक दिया. मल्हार होल्कर की मृत्यु के बाद, उनके पुत्र नर राव को राजा बने और उनकी भी मृत्यु के बाद अहिल्याबाई ने 1767 में पदभार संभाला.

अहिल्याबाई एक बहुत अच्छी प्रशासक थीं और इंदौर शहर उनके शासनकाल के दौरान इसका गवाह बना. उन्होंने अपने राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में पानी की टंकियों, सड़कों, घाटों, धर्मशालाओं आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्माण करवाया.

अहिल्याबाई को ब्रिटिश इतिहासकार जॉन कीस ने ‘द फिलॉसोफर क्वीन’ की उपाधि दी. मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर दार्शनिक और कुशल राजनीतिज्ञ भी थीं. वो लगातार राजनीतिक परिदृश्य पैनी नजर बनाए रखती थीं. अहिल्याबाई होल्कर का 13 अगस्त, 1795 को 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ था.

– Legend News

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