पीएम मोदी की अपील का बड़ा असर, टॉय हब बनेगा ग्रेटर नोएडा

लखनऊ। मन की बात में पीएम मोदी ने खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने की जो अपील की थी, उसका जोरदार असर देखने को मिल रहा है। यूपी सरकार के पास घरेलू खिलौना बनाने वालों ने 92 आवेदन किए हैं। जल्द ही ग्रेटर नोएडा टॉय हब बनने वाला है।
हाल ही में मन की बात में पीएम मोदी ने खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने वाली बात कही थी। उन्होंने कहा था कि आत्मनिर्भर भारत के लिए खिलौने बनाएं। उनकी इस अपील का जोरदार असर देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार को खिलौने बनाने की फैक्ट्री लगाने के लिए 92 आवेदन मिले हैं। आने वाले दिनों में ग्रेटर नोएडा में जेवर एयरपोर्ट के पास टॉय मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी है। बता दें कि अभी चीन (चेंगाई) और ताइवान से करीब 90 फीसदी खिलौनों का आयात किया जाता है लेकिन अब ग्रेटर नोएडा भारत का चेंगाई बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
खिलौना उद्योग लगाने के लिए अगस्त महीने की शुरुआत में ही एक स्कीम के तहत आवेदन मांगे थे और इसकी आखिरी तारीख 31 अगस्त थी। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के सीईओ अरुण वीर सिंह ने बताया कि अथॉरिटी के बाद अलग-अलग साइज के 155 प्लॉट हैं और 92 एप्लिकेशन आ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बचे हुए प्लॉट का किसी दूसरी स्कीम के तहत आवंटन किया जाएगा। जब पूरे 100 एकड़ का आवेदन हो जाएगा तो अथॉरिटी को करीब 3000 करोड़ का निवेश मिलने का अनुमान है।
क्या है सरकार की तैयारी?
सरकार की तैयारी तो यहां तक है कि घरेलू खिलौनों को बढ़ावा देने के लिए वह खिलौनों का मेला तक लगाने पर विचार कर रही है। 1 सितंबर से आयात किए जाने वाले खिलौनों को लेकर क्वालिटी कंट्रोल पर भी फोकस किया जाएगा, सिर्फ वही खिलौने देश में आएं, जो स्टैंडर्ड पर खरे उतरते हों। इससे एक तो उत्तरी भारत खिलौना उद्योग का हब बन जाएगा, वहीं दूसरी ओर बहुत सारे नौकरी के मौके भी पैदा होंगे।
क्या है चेंगाई, जिसे टक्कर देगा ग्रेटर नोएडा
खिलौनों की बात आते ही चेंगाई का जिक्र जरूर होता है। दरअसल, चेंगाई चीन का एक जिला है, जो ग्वांगझांग प्रांत में है। चेंगाई को चाइना टॉय & गिफ्ट सिटी के नाम से भी जाना जाता है। ये नाम चेंगाई को अप्रैल 2003 में दिया गया था। यहां से भारी मात्रा में खिलौनों और गिफ्ट का निर्यात किया जाता है। इतना ही नहीं, चेंगाई सो सिटी ऑफ वुलेन स्वेटर्स भी कहते हैं। अब पीएम मोदी की अपील के बाद ग्रेटर नोएडा में खिलौने बनाने की तमाम फैक्ट्रियां लगने वाली हैं, जो ग्रेटर नोएडा को चेंगाई की टक्कर का बना देंगी।
दिख रहे रिवाइवल के संकेत
काफी समय बाद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से एक अच्छी खबर सामने आ रही है। कारों की बिक्री में तगड़ा इजाफा हुआ है। मार्केट में 70 फीसदी से अधिक का हिस्सा रखने वाली मारुति और हुंडई की सेल्स में तगड़ा इजाफा हुआ है। पीएमआई एंडेक्स भी बढ़ा है। ये सब इंडस्ट्री में रिवाइवल को दिखाते हैं।
खिलौना उद्योग पर ये बोले थे पीएम मोदी
पीएम ने मन की बात में कहा था कि खिलौने एक्टिविटी बढ़ाते हैं मन बहलाते हैं। खिलौनों के सम्बन्ध में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था कि best Toy वो होता है जो Incomplete यानी अधूरा होता है। यानी ऐसा खिलौना, जो अधूरा हो और बच्चे मिलकर खेल-खेल में उसे पूरा करें। पीएम ने कहा कि भारत में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं। यहां तक कि भारत के कुछ इलाके Toy Clusters यानी खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित होने लगे हैं जैसे, कर्नाटक के रामनगर में चन्नापटना, आंध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी, उत्तर प्रदेश का वाराणसी और ऐसे ही कई अन्य स्थान हैं।
खिलौने से पीएम ने साधे कई निशाने
पीएम ने भारत में खिलौना उद्योग को प्रोत्साहन देने का काम कर के एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक तो लोकल खिलौनों से आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। दूसरा इससे बहुत सारे लोगों के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे। तीसरा चीन को झटका लगेगा और उस पर हमारी निर्भरता घटेगी, जहां से बहुत सारे खिलौने आयात किए जाते हैं। इतना ही नहीं, लोग इस ओर प्रोत्साहित होकर काम शुरू करेंगे तो बाजार चलेगा, जिससे पैसे का सर्कुलेशन शुरू होगा और अर्थव्यवस्था का पहिया रफ्तार पकड़ने लगेगा। कोरोना काल में डूब रही अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे कदमों की बहुत जरूरत है।
भारत का खिलौना कारोबार कितना बड़ा?
एक मार्केट रिसर्च फर्म आईएमएआरसी के अनुसार भारत में खिलौनों का करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसमें से संगठित खिलौना बाजार 3.5-4.5 हजार करोड़ का है। यहां बताते चलें कि भारत में अभी भी 80 फीसदी से अधिक खिलौने चीन से आते हैं। ऐसे में चीन से निर्भरता हटाने पर और लोकल को वोकल करने से खिलौना उद्योग में बहुत सारे अवसर खुलेंगे। यह भी दिलचस्प है कि खिलौना उद्योग करीब 15 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है, जिसमें लोकल फॉर वोकल होने पर तगड़ी तेजी देखी जा सकती है।
-एजेंसियां

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