देश को Missile शक्ति बनाने में बड़ा योगदान था 8वें राष्ट्रपति का

अगर आप से पूछा जाए कि देश को Missile शक्ति बनाने में किस का योगदान है तो आपकी जुबान पर खुद ब खुद डॉ.अब्दुल कलाम का नाम आ जाएगा। इसमें कोई शक नहीं कि देश को Missile देने में बड़ा योगदान डॉ. कलाम का है लेकिन इसकी बुनियाद रखने का श्रेय देश के 8वें राष्ट्रपति डॉ. आर. वेंकटरमन को जाता है। उनका निधन 27 जनवरी, 2009 को हुआ था।
भारत के पास आज मिसाइलों का बड़ा भंडार है। हमारे पास ऐसी मिसाइले हैं जो चीन और पाकिस्तान के काफी अंदर तक निशाना बनाने की क्षमता रखती है। हमारे पास जमीन से जमीन, हवा से हवा और जमीन से हवा में मार करने वाली घातक मिसाइले हैं।
आइए इस मौके पर जानते हैं कि कैसे उन्होंने देश को Missile शक्ति बनाने की बुनियाद रखी…।
DRDO से शुरुआत
दौलत सिंह कोठारी को भारतीय रक्षा विज्ञान का पिता कहा जाता है। वह 1948 से 1961 तक रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे। आज अगर भारत के पास रक्षा के मैदान में अनुसंधान और विकास के लिए डीआरडीओ जैसा संस्थान है तो उसके पीछे दौलत सिंह कोठारी का योगदान है। उन दिनों दुनिया के विकसित देश बैलिस्टिक Missile बना रहे थे। बैलिस्टिक मिसाइल के खतरे से उन्होंने 1958 में आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि बैलिस्टिक मिसाइल न सिर्फ भारत बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है। इसकी वजह यह है कि बैलिस्टिक मिसाइल न्यूक्लियर वारहेड (बम) को ले जाने में सक्षम है जिसकी मदद से पूरे देश को तबाह किया जा सकता है। वारहेड असल में विस्फोटक या जहरीली सामग्री होती है। यह एक तरह का बम होता है। इसके बाद ही देश में रक्षा संबंधित अनुसंधान और निर्माण की जरूरत महसूस की गई और फिर 1958 में डीआरडीओ अस्तित्व में आया।
1979 और 1982 में अहम प्रगति
साल 1979 में डीआरडीओ के चेयरमैन राजा रमन्ना थे। वह रक्षा मंत्रालय के नेतृत्व वाली एक कमेटी के अध्यक्ष भी थे। कमेटी ने एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) पर काम करने का सुझाव दिया। इसके बाद ही भारत में देसी स्तर पर मिसाइल निर्माण के बारे में गंभीरता से सोचा जाने लगा।
साल 1982 में इस परियोजना को रफ्तार मिली। उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं और रक्षा मंत्री थे रामास्वामी वेंकटरमन जिनको आर. वेंकटरमन भी कहते हैं।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पूरी तरह जिद पर अड़ गईं कि भारत को आयात करने की बजाय देशी मिसाइल सिस्टम तैयार करना शुरू करना चाहिए।
वेंकटरमन का योगदान
साल 1982 में केंद्र सरकार ने एक मिसाइल स्टडी टीम का गठन किया। उस टीम की कमान डॉ. एपीजेअब्दुल कलाम को सौंपी गई। उनको रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला का निदेशक नियुक्त किया गया। डॉ. कलाम डीआरडीओ में आने से पहले अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर काम कर रहे थे। उनको डिफेंस प्रोग्राम में ट्रांसफर आर. वेंकटरमन ने ही किया था।
असल टर्निंग पॉइंट
कलाम के नेतृत्व में स्टडी टीम ने गहन अध्ययन किया। इस टीम ने साल 1982 में आयोजित एक उच्च स्तरीय मीटिंग में मिसाइल सिस्टम को विकसित करने का खाका पेश किया। मीटिंग में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, रक्षा मंत्री वेंकटरमन, तीनों सेनाओं के अध्यक्ष, पीएमओ के प्रधान सचिव, एक कैबिनेट सचिव, डीआरडीओ के अध्यक्ष वी. एस. अरुणाचलम और अब्दुल कलाम मौजूद थे।
मीटिंग में कलाम ने पांच मिसाइलों को अलग-अलग चरणों में विकसित करने का सुझाव रखा। वेंकटरन ने कलाम के विजन की तारीफ की लेकिन वह अलग-अलग चरणों में मिसाइल निर्माण के पक्ष में नहीं थे। इसकी बजाय उन्होंने सभी मिसाइल प्रोग्राम पर एक साथ ही काम करने पर जोर दिया। इंदिरा गांधी ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और तब इस प्रोजेक्ट पर कलाम के साथ दो अन्य वैज्ञानिकों वी. के. सारस्वत और अविनाश चंदर ने काम करना शुरू कर दिया।
-एजेंसियां

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