श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का बड़ा ऐलान, प्रस्तावित मॉडल पर ही 2022 तक बन जाएगा राम मंदिर

अयोध्‍या। अयोध्या पहुंचे संतों ने राम मंदिर को लेकर बड़ा ऐलान किया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा है कि मंदिर प्रस्तावित मॉडल पर ही बनेगा।
अखिल भारतीय संत समिति के जितेंद्र सरस्वती ने कहा कि मंदिर 2022 तक बन जाएगा। बता दें कि दोनों संत राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव में पहुंचे हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगतगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि प्रस्तावित मॉडल पर ही राम मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि यह मॉडल करोड़ों हिंदुओं के दिल में बसा है। इसका पूजन घर-घर हो चुका है। इस दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग विश्व का सबसे ऊंचा राम मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं, मैं उनको नहीं जानता। मैं उनसे पूछता हूं कि कितना ऊंचा मंदिर बनाना चाहते हैं।
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि विशाल राम मंदिर की मांग करने वाले खुद विशालता की परिभाषा नहीं जानते। वे इसकी परिभाषा बताएं। उन्होंने ऐसे संतों को सचेत करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण को लेकर बुद्धि की विपरीतता का प्रदर्शनन करें। संगमरमर के पत्थर से मंदिर बनाने पर वासुदेवानंद ने कहा कि संगमरमर का पत्थर है कहां? मकराना-उदयपुर, जयपुर में मकराना के पत्थर नहीं हैं। ये कचरे पत्थर हैं जो 10 साल में टूट जाएंगे।
स्वामी वासुदेवानंद रामलला का दर्शन करने और ट्रस्ट के अध्यक्ष को जन्मोत्सव की बधाई देने रामनगरी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि समतलीकरण और मिट्टी बैठने के बाद मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा। सरकार बनती रहेगी और मंदिर का काम होता रहेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण में सीमेंट-गारे से जुड़ाई होकर सुखाना नहीं केवल पत्थरों को सेट करते जाना है। ऐसे में मंदिर का निर्माण कम समय में ही पूरा हो जाएगा।
उधर अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्र आनंद सरस्वती ने कहा कि रामलला का मंदिर 2022 तक बन जाएगा। हमारी इच्छा है कि जब लोग चुनाव के मैदान में उतरें, उससे पहले रामलला मंदिर में खेलते हुए दिखें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने सदैव राम मंदिर निर्माण में बाधाएं पहुंचाने का ही काम किया। जब रामलला के भक्त योगी आदित्यनाथ सत्ता में आए तभी मंदिर का फैसला हो सका।
जितेंद्र आनंद सरस्वती ने कहा, ’20हजार पेज का अनुवाद करके सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करवाया तब डेली हियरिंग पर फैसला आया। कांग्रेस और रामालय ट्रस्ट ने समय-समय पर मंदिर के काम में बाधाएं पहुंचाने का काम किया। अब ऐसे तत्व राम मंदिर निर्माण का काम कोरोना की आड़ में रुकवाने के लिए सक्रिय हैं।इनकी मांग पर पाकिस्तान में मंदिर निर्माण रोकने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर मंदिर निर्माण जल्द शुरू होगा। जो लोग मंदिर को लेकर बयान दे रहे हैं वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कर रहे हैं।’
-एजेंसियां

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