इंस्टालमेंट क्लीयरिंग में चेक बाउंस का ‘खेल’ कर लूट रहीं हैं बैंक

मुंबई। आजकल ज्यादातर बैंक जनता को विभिन्न तरीकों से लूट रही है और जनता को पता ही नहीं चलता है। ज्यादातर बैंकों के फाइन का अलग से एसएमएस नहीं आता है, आखिर क्यों?

यदि 3 बार से ज्यादा दूसरी बैंकों के एटीएम से निकालते हैं तो जो चार्ज लगता है, उसका अलग से मैसेज नहीं आता है। यदि आपके बैंक में 1000 रुपयेहैं और चौथी बार निकाल रहे हैं तो जब तक उसके ऊपर फाइन के रुपये नहीं होंगे तब तक पैसे नहीं निकलते हैं। आखिर क्यों?

फाइन तो बाद में लगना चाहिए, जब पैसे निकलेंगे, लेकिन चौथी बार निकालते वक्त ही फाइन का पैसा क्यों होना चाहिए? आज भी ज्यादातर एटीएम में केवल 500 के ही नोट होते हैं, जबकि 100 के नोट जरूरी हैं, यदि रात में किसी को रिक्शा इत्यादि को छुट्टा देना है तो लोगों को बड़ी दिक्कत होती है और एटीएम कार्ड तो एक ही बार कई वर्षों के लिए देते हैं लेकिन हर साल कार्ड का पैसा लेते है, आखिर क्यों?

बैंक आजकल मिनिमम बैलेंस के नाम पर हर महीने मनमाना पैसा वसूल रही हैं, जबकि जितना फाइन लेती हैं, उसका नाममात्र भी ब्याज नहीं देतीं। जबकि बैंक तो जनता के पैसे से ही चल रही हैं। मिनिमम बैलेंस के फाइन को आरबीआई को तय कर देना चाहिए, जिससे वे जनता को ज्यादा लूट ना सके। एसएमएस, मिनिमम बैलेंस, कॉर्ड का चार्ज कभी भी काट लेती हैं। कभी भी लोगों के चेक बाउंस हो जाते हैं, जबकि इसका भी एक फिक्स्ड डेट होना चाहिए कि यह कब कटेगा और कौन सी तारीख को कटेगा। कई बार बैंकों की मिलीभगत की वजह से बैंक के इंस्टालमेंट के ठीक दिन ही यह फाइन काटा जाता है, जिससे दोनों बैंकों को फाइन मिलता है।

आजकल इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के नाम पर जनता को सबसे ज्यादा लूटा जा रहा है। आज जब किसी लोन या इंस्टालमेंट का चेक इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के जरिए बैंक में आता है तो दो दिन में तीन बार चेक बाउंस करा लिया जाता है और दोनों तरफ की बैंक या फाइनेंस कंपनी तीन तीन बार चेक बाउंस का चार्ज लगा लेती हैं। जितने का चेक नहीं होता है, उससे ज्यादा फाइन हो जाता है। यदि बैंक में किसी कारण पैसा नहीं है तो तीन बार दो दिन में बाउंस कराने का क्या फायदा है? यह कमाने का तरीका बैंकों ने बना रखा है। यह बंद होना चाहिए। एक बार बाउंस होने के बाद बिना पार्टी से पूछे दोबारा क्लीीयरेंस के लिए चेक नहीं भेजना चाहिए।

इसके अलावा कई बैंक तथा फाइनेंस कंपनी ऑनलाइन एप्‍स के जरिए लोंगों को ठग रही हैं इनमें से ज्यादातर तो 10 हज़ार, 25 हज़ार या 50 हज़ार देकर हर साल का 24%से 50 % ब्‍याज वसूल रही हैं और ऊपर से प्रोसेसिंग फीस अलग से और ज्यादातर जनता इनके जाल में फंसती जा रही है। जो कि आगे चलकर बहुत बड़ा जी का जंजाल सरकार व लोगों के लिए बन सकता है।इसे सरकार व आरबीआई को रोकना चाहिए या ब्‍याज दर तय करना चाहिए। आज जनता महँगाई व बेरोजगारी से परेशान है और कर्ज ले रही है लेकिन यह बहुत बड़ा खतरा देश की जनता के लिए बन सकता है और लोगों के आत्महत्या का कारण बन सकता है। समय रहते सरकार व आरबीआई को जाग जाना चाहिए।

– संजय शर्मा ‘राज’

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