हिन्दूद्वेषी ऑनलाइन वेब सीरीज Paatal Lok पर प्रतिबंध की मांग

नई द‍िल्ली। हिन्दू जन जागृति समिति ने हिन्दूद्वेषी ऑनलाइन वेब सीरीज Paatal Lok पर प्रतिबंध लगाने की मांग सरकार से की है। अनुष्का शर्मा के प्रोडक्शन द्वारा निर्मित पाताल लोक नामक वेबसीरीज पूर्णतः हिन्दूविरोधी भूमिका से बनाई गई है तथा उसमें अत्यंत आपत्तिजनक दृश्य दिखाए गए हैं । इसमें एक कुतिया का नाम सावित्री रखा गया है, मंदिर में पुजारी मांस पकाकर खाते हुए दिखाए गए हैं, भगवा वस्त्र परिधान किए हुए लोग जय श्रीराम कहते हुए गुंडागर्दी करते हुए दिखाए गए हैं, साधु-संतों को असभ्य अपशब्द कहते हुए दिखाया गया है।

एक प्रसंग में एक व्यक्ति को जनेऊ पहनकर बलात्कार करते हुए दिखाया गया है, एक मुसलमान महिला हिन्दू महिला को पानी देती है, तब वह हिन्दू महिला पानी पीने से मना कर देती है, ऐसे अनेक समाज में अनबन उत्पन्न करनेवाले तथा हिन्दू धर्म के संबंध में द्वेष फैलानेवाले दृश्य दिखाए गए हैं ।

यह अत्यंत निंदनीय है तथा हिन्दू जनजागृति समिति इसका तीव्र शब्दों में निषेध कर रही है तथा समिति ने मांग की है कि वेबसीरीज पाताल लोक पर शासन तत्काल प्रतिबंध लगाए ।

आजकल युवा पीढ़ी को बड़ी मात्रा में आकर्षित करने वाले एमेजोन, नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, अल्ट बालाजी आदि अनेक ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से पाताल लोक, लैला, सेक्रेड गेम्स, गंदी बात, कोड एम. और गेम ऑफ थ्रोन्स जैसी आपत्तिजनक वेबसीरीज दिखाई जा रही हैं। इन वेबसीरीज पर शासन, प्रशासन अथवा सेन्सर बोर्ड आदि में से किसी का भी बंधन अथवा नियंत्रण नहीं है। परिणामस्वरूप इन माध्यमों से देशविरोधी, सेनाविरोधी, हिन्दूविरोधी, अश्‍लील, हिंसक, आपत्तिजनक और धार्मिक अनबन उत्पन्न करनेवाले दृश्य-संवाद बड़ी मात्रा में प्रसारित किए जा रहे हैं।

यह अत्यंत गंभीर है तथा देश की एकता और सामाजिक शांति के लिए संकटदायी है। इसलिए इन सभी वेबसीरीज पर नियंत्रण करने के लिए शासन सेन्सर बोर्ड जैसी व्यवस्था बनाए। तब तक इन सभी वेबसीरीज पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग हिन्दू जन जागृति समिति ने की है ।

इस मांग को आज ट्वीटर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बडी मात्रा में समर्थन मिला है। आज दिन भर में #BoycottPaatalLok और #CensorWebSeries यह हैशटैग पहले दस में ट्रेंड कर रहा था । देशभर से इस संबंध में 63 हजार से अधिक लोगों का उपरोक्तानुसार ट्वीट देखने को मिला।

उपलब्ध आकड़ों के अनुसार इसमें से 3000 करोड़ रुपयों का कारोबार होता है परंतु इतनी बड़ी मात्रा में दर्शक संख्या होते हुए भी जिस प्रकार चलचित्र के लिए केंद्रीय चलचित्र परिनिरीक्षण मंडल (CBFC) है, वैसा इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए हम यह मांग भी करते हैं कि केंद्र शासन इस पर नियंत्रण रखने के लिए कठोर कानून बनाए।

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