सूडान में महिलाओं के खतने पर बैन, गैर मुस्‍लिमों के लिए शराब पीने की छूट

सूडान की अंतरिम सरकार ने नए कानून बना लिए हैं जिनके तहत महिलाओं के खतने पर बैन लग गया है, गैर-मुस्लिमों को शराब पीने और इस्लाम त्यागने की इजाजत भी मिल गई है।
सूडान में करीब 30 साल तक कट्टर इस्लामिक शासन रहा। पिछले साल बड़े आंदोलन के बाद उमर अल-बशीर के शासन को उखाड़ फेंका गया।
अब वहां की अंतरिम सरकार देश को प्रगतिशील बनाने की राह पर चल पड़ी है। अप्रैल के महीने में महिलाओं के खतने को अपराध करार देने के बाद इसे लेकर कानून बना लिया गया है। इसके साथ ही सरकार दूसरे नए कानून भी लाई है, जिनमें गैर-मुस्लिमों को शराब पीने का अधिकार, इस्लाम त्यागने का अधिकार, महिलाओं को बिना पुरुष रिश्तेदारों के सफर करने का अधिकार दिए गए हैं। इनके बारे में जानकारी देते हुए देश के न्याय मंत्री नसरुद्दीन अब्दुलबरी ने कहा कि ऐसे सभी कानूनों को खत्म किया जा रहा है जिनसे मानवाधिकार उल्लंघन होता है।
खतने पर प्रतिबंध का कानून
पिछले साल तख्तापलट के बाद देश में बनी अंतरिम सरकार ने खतना को अपराध करार देने वाला कानून तैयार कर लिया है। किसी भी मेडिकल संस्थान या घरों में भी खतना किए जाने पर तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। इसे करने वाले डॉक्टर-नर्स को भी एक्शन का सामना करना पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक सूडान में 10 में से 9 महिलाओं का खतना किया जाता था। खतना एक ऐसी परंपरा होती है जिसमें महिलाओं के प्राइवेट पार्ट या उसके एक हिस्से को काट दिया जाता है। न सिर्फ यह प्रक्रिया दर्दनाक होती है बल्कि बेहद खतरनाक भी। कई मामलों में बच्चियों की जान तक चली जाती है।
गैर-मुस्लिम पी सकेंगे शराब
देश में अब गैर-मुस्लिमों को प्राइवेट में शराब पीने की इजाजत होगी। हालांकि, मुस्लिमों पर इसका प्रतिबंध लगा रहेगा। अगर कोई गैर-मुस्लिम किसी मुस्लिम के साथ शराब पीता पाया गया, तो उसे भी सजा होगी। अब्दुलबरी का कहना है कि सरकार देश में रहने वाले 3% गैर-मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है। उन्हें शराब पीने, आयात करने और बेचने की इजाजत भी होगी। देश में शराब पीना तब से बैन है जब 1983 में तत्कालीन राष्ट्रपति जफर निमेरी इस्लामिक कानून लेकर आए थे। उन्होंने तब नील नदी में विस्की की बोतलें फेंककर इस पर पाबंदी लगाई थी। बशीर ने सत्ता में आने के बाद इस्लामिक कानूनों को जारी रखा था।
इस्लाम त्यागने का अधिकार
सूडान में इस्लामिक कानून के तहत इस्लाम को त्यागने पर मौत की सजा भी हो सकती थी। अब्दुलबरी ने कहा कि पहले का कानून की सुरक्षा के लिए खतरा था। इसके अलावा देश में पहले कई अपराधों के लिए सार्वजनिक रूप से सजा दी जाती थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है। अब किसी महिला को बिना पुरुष रिश्तेदार के सफर करने की इजाजत भी दे दी गई है। इससे पहले नवंबर में ऐसा प्रतिबंध को हटा लिया गया था जिसमें महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर कैसे पहनना-ओढ़ना है और व्यवहार करना है, यह तय किया गया था।
-एजेंसियां

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