गोहत्या पर प्रतिबंध: यूपी की भांति पूरे देश के लिए बने कठोर कानून

फरीदाबाद। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गोहत्या रोकने के लिए नया अध्यादेश जारी किया है। इसके अनुसार गोहत्या करनेवालों को 10 वर्ष का कारावास और 5 लाख रुपए दंड होगा । योगी सरकार का यह निर्णय अत्यंत सराहनीय है, हिन्दू जनजागृति समिति इसका स्वागत करती है।

हिंदू जनजागृति समिति, द‍िल्ली के सुरेश मुंजाल ने कहा क‍ि हाल ही में केरल में एक गर्भिणी हथिनी को पटाखों से भरा अनानास खिलाया गया था, जिससे वह गंभीररूप से घायल हुई और अंत में तडप-तडप कर मर गई। इस घटना को दो ही दिन बीते होंगे कि हिमाचल प्रदेश में गाय को विस्फोटक खिलाया गया, जिससे वह गंभीररूप से घायल हुई। देश में प्राणियों और गोमाता पर होनेवाले अत्याचार तथा हत्याएं रोकने के लिए कठोर कानून नहीं है। इसीलिए क्रूरतापूर्ण अमानवीय कृत्य करने का दुस्साहस बढ रहा है। इतना ही नहीं, अनेक गोरक्षकों की दिन दहाडे हत्या हो रही है। अनेक बार जांच में ढिलाई बरतते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी धर्मांध कसाईयों की सहायता करता है।

ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार ने जो यह अध्यादेश जारी किया है, वह गोरक्षा के लिए अर्थात संतों-महंतों, हिन्दुत्वनिष्ठों, गोरक्षकों से सर्वसामान्य गोप्रेमियों तक सबके लिए आशा की एक किरण है। गोमाता की रक्षा के लिए केवल उत्तर प्रदेश नहीं, अपितु पूरे देश में ऐसा कठोर कानून लागू हो, यह मांग हिन्दू जनजागृति समिति ने की है।

वर्ष 1947 में 90 करोड़ देशी गोधन था, जो अब घटकर 2-3 करोड़ रह गया है । आज देश के 29 राज्यों में केवल 20 में गोहत्या के विरुद्ध नियम बने हैं परंतु इन कानूनों में दंडव्यवस्था कठोर न होने के कारण गोहत्यारों को भय नहीं लगता । अधिकतर प्रकरणों में अभियुक्त जमानत पर तुरंत छूट जाते हैं और पुनः वही कानून विरोधी कृत्य करने लगते हैं। अनेक स्थानों पर पशुवधगृहों और वाहनों पर पुलिस और गोरक्षकों ने मिलकर छापे मारे। तब बड़ी मात्रा में गोमांस जब्त हुआ। परंतु इसके आगे कोई कार्यवाही नहीं होती।

समिति ने मांग की है क‍ि यदि यह रोकना है तो राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों के लिए एक कठोर कानून बनाना आवश्यक है। उसी के साथ गोपालन के लिए गोमूत्र, गोबर, पंचगव्य आदि से बननेवाले उत्पादों को तथा गो-चिकित्सा को बढ़ावा देना चाहिए। इस विषय में बड़ी मात्रा में शोध की और अन्य विशेष योजनाएं चलाने की आवश्यकता है। इसके लिए स्वतंत्र ‘गो-मंत्रालय’स्थापित क‍िया जाए।

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