कलाकारों-साह‍ित्यकारों ने की ब्रजभाषा अकादमी बनाने की मांग

मथुरा। ब्रजभाषा साहित्य एवं लोक कला संस्थान के तत्त्वावधान में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया के आह्वान पर ब्रज क्षेत्र के शीर्षस्थ साहित्यकार, कवि एवं कलाकारों ने ब्रजभाषा – साहित्य – संस्कृति के संरक्षण – संवर्द्धन की दिशा में की जा रही उपेक्षा के प्रति वेदना व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश में ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना की माँग की।

सर्वेश्वरी सदन सभागार में आयोजित उक्त समारोह में दीप प्रज्वलन के पश्चात पद्मश्री भाटिया ने कहा कि देश की सर्वाधिक समृद्ध ब्रज संस्कृति के प्रति की जा रही उपेक्षा के कारण प्रत्येक ब्रजवासी व्यथित है और इस दिषा में मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ स्थानीय सांसद, मंत्रीद्वय तथा विधायकगण के प्रयास भी आवष्यक हैं।

ब्रजभाषा साहित्य एवं लोक कला संस्थान की अध्यक्षा डा. सीमा मोरवाल ने कहा कि संस्थान के मंच से ब्रजभाशा के अधिकाधिक प्रसार तथा कवि – कलाकार – साहित्यकारों की समस्याओं के समाधान संघठित प्रयास किये जायेंगे।

साहित्यकार डा0 अनुपम गौतम ने कहा कि साहित्यिक – सांस्कृतिक क्षेत्र में ब्रजभाशा की उपेक्षा चिन्तनीय हो गई है। इस सम्बन्ध में मौन को गलत रूप में लेकर शासन निष्क्र‍िय बना हुआ है।

इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में ब्रजभाशा कवि राधा गोविन्द पाठक ने कहा – प्रेम की भाषा जि मंजु मनोहर, चित्त हरै हुलसै ब्रजभाषा।

मोहन लाल मोही की रचना –
पग – पग राधे – राधे है रहि घर – घर झाँकी श्याम की।

जितेन्द्र विमल ने कहा – कान्हा के बिन जगती सूनी।

गोष्ठी संयोजक गोपाल प्रसाद उपाध्याय ने गर्व व्यक्त किया –
हम हैं कन्हैया के, कन्हैया हमारौ है।

कवि सम्मेलन में श्रीमती अंजू शर्मा, श्रीमती रेनु उपाध्याय, नारायण सिंह किलौनी आदि ने भी काव्य पाठ किये।

समारोह में संस्था के उपाध्यक्ष संजय सिंह, कोषाध्यक्ष रजत शुक्ला, हरीओम अग्रवाल माँट वाले, माधुरी शर्मा, हरीष ठाकुर, नरेश सिंह, कपिल देव उपाध्याय, पवन आनन्द, दामिनी अग्रवाल, डा0 एस0 पी0 गोस्वामी आदि उपस्थित थे।

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