आर्ट ऑफ लिविंग आयोज‍ित करेगा योग व ध्यान की फ्री ऑनलाइन वर्कशाॅप

 

नई दिल्ली, 7 मई, 2021ः आर्ट ऑफ लिविंग (Art of living)  ने तीन मुख्य प्रोटोकाॅल लाॅन्च किए ताकि लोगों को कोविड की इस दूसरी लहर में इम्यूनिटी, फेफड़ों की क्षमता को बेहतर करने के साथ ही बैचेनी और तनाव से राहत प्रदान की जा सके। कोरोना की दूसरी लहर के कारण एक तरफ दुःख और दूसरी तरफ आर्थिक और प्रोफेशनल झटकों ने लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस महत्वपूर्ण समय में लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद करने के लिए, द आर्ट ऑफ लिविंग ने लोगों को अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने, अपनी मानसिक स्थिति को बेहतर करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के लोगों के लिए आसन, ध्यान और श्वास अभ्यास या प्राणायाम के 3 प्रोटोकॉल की एक बेहद उपयोगी और जरूरी सीरीज की शुरूआत की है। इस प्रयास के माध्यम से आर्ट ऑफफ लिविंग इस अस्थिर माहौल में लोगों को तनावरहित और शांति महसूस करवाने का प्रयास कर रही है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की फेकेल्टी देश भर में जारी इन कोशिशों के दौरान लोगों को इस लहर के दौरान अपने आप को संभलने में मदद करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी TheArtOfLiving

भारत में आर्ट ऑफ लिविंग के सभी प्रशिक्षित योग और ध्यान शिक्षक वर्तमान संकट में सभी समुदायों का समर्थन करने के लिए नॉनस्टॉप ऑनलाइन निःशुल्क कार्यशालाओं (फ्री वर्कशाॅप्स) का संचालन करेंगे।

आसन और प्राणायाम के 15-20 मिनट के प्रोटोकॉल को तीन श्रेणियों में लोगों को सक्रियता से हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जाएगाः

ए. स्वस्थ लोगों के लिए उन्हें संपूर्ण इम्युनिटी और फेफड़ों की क्षमता बनाने में मदद करने के लिए।

बी. हल्के लक्षणों वाले लोगों को उनके घर या अस्पताल में प्रभावी श्वास संबंधी व्यायामों के साथ सहायक इंटरवेंशन का मौका दिया जाएगा।

सी. कोविड से उबरने के दौरान सामान्य जिंदगी में वापिस लौटने और तेजी से रिकवरी प्राप्त करने में उपयोगी।

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ, एक तरफ मेडिकल आइसोलेशन और वहीं दूसरी ओर लाॅकडाउन, लोग ऐसे माहौल में इन दिनों अकेलेपन और भय से भी जूझ रहे हैं। सभी देशों, राज्यों, संस्कृतियों, समुदायों और आर्थिक वर्गों के लोग इस महामारी के परिणामस्वरूप बुरी तरह से प्रभावित हैं। ये प्रोटोकॉल उन लोगों को आशा देगा जो होम आइसोलेशन या क्वारेंटाइन में हैं, और उन्हें इस प्रयास में किसी से बात करने का मौका मिलेगा। इससे अस्पताल में भर्ती होने के लिए डर, चिंता और भीड़ को कम करने में भी मदद मिलेगी।

कुछ मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, केवल 5 से 7 प्रतिशत रोगियों को वास्तव में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। कई लोग घर पर ही प्राणायम और श्वास संबंधित विभिन्न प्रयासों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं आयुर्वेद के साथ-साथ कई अन्य प्रायोगिक औषधियों जैसे काबासुराकुडीनेर, एक प्रमाणित और परखी हुई सिद्ध फार्मूलेशन से भी काफी लाभ प्राप्त किया जा सकता है। फ्रैंकफर्ट बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर, जर्मनी के अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना वायरस के स्ट्रेन के मामले में उपयोग किए जाने पर स्पाइक ग्लाइकोप्रोटीन एक मजबूत अवरोधक (84 प्रतिशत) पाया गया है। इनविट्रो स्टडीज के अनुसार ये वायरस को सेल्स यानि कोशिकाओं में प्रवेश को रोकता है।

यह भी कहा गया है कि कोविड​​-19 के अनुभव वाले लगभग 10 प्रतिशत लोगों में लंबे समय तक लक्षण पाए जाते हैं, जिनमें सांस लेने में तकलीफ, सांस उखड़ना, नाक बहना, रक्त के थक्के, सिरदर्द, मतली, मांसपेशियों में दर्द और थकान आदि शामिल हैं जो नोवेल कोरोना वायरस के टेस्ट में पाॅजिटिव आने के कई महीनों बाद भी जारी रह सकते हैं।

लेकिन इन सब के बावजूद आखिर, उम्मीद तो है।

कैलिफोर्निया में लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने प्रभावी पल्मनरी रीहैबलिएटेशन उपचारों का विश्लेषण किया और निर्धारित किया कि सांस लेने के व्यायाम डायाफ्राम को मजबूत करते है। आसान शब्दों में कहा जाए तो ये व्यायम श्वास प्रणाली और फेफड़ों को काफी मजबूत करते हैं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के तीन चरणों में वगीकृत प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम मरीजों की रिकवरी के लिए काफी उपयोगी पाए गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) योग को एक मूल्यवान माध्यम के रूप में वर्णित करता है, जो शारीरिक गतिविधि, मानसिक स्वस्थता को बढ़ाता है और गैर-संक्रामक रोगों को कम करता है। योग आसानों और प्राणायम आदि से शारीरिक या मनोवैज्ञानिक तौर पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। कई तरह के आसान प्रयासों से रोगी बेहतर हो रहे हैं और वे विश्राम, शारीरिक लचकता, सांस लेने का व्यायाम, लड़ने की क्षमता, स्वीकृति और आत्म-प्रभावकारिता आदि से लाभान्वित हुए हैं। (बुसिंग एट आॅल. 2021)।

रिकवरी की प्रक्रिया में, ध्यान मन की एक आरामदायक स्थिति को प्राप्त करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो उपचार और रोग से उबरने को सक्षम बनाता है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सिर्फ बीस मिनट के दैनिक ध्यान से रक्त में कोर्टिसोल का स्तर कम हो सकता है और एंडोर्फिन बढ़ सकता है जिससे मन की सकारात्मक और खुशहाल स्थिति बेहतर हो सकती है।

आर्ट ऑफ लिविंग अपने इन कार्यक्रमों में सिखाए गए योग, प्राणायाम, ध्यान और सुदर्शन क्रिया का नियमित अभ्यास शांति, लचीलापन और स्वास्थ्य प्रदान करता है। यह प्रभावी रूप से तनाव हार्मोन को कम कर सकता है, तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को मजबूत कर सकता है, लिम्फिटिक सिस्टम को बढ़ा सकता है, और साथ ही शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी निकाल सकता है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें –   Visit http://aoliv.in/fightcorona

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