Lockdown में बच्चों को रचनात्मक बनाने की पहल

मथुरा। बाजारों में दुकानों पर व्यस्त रहने के कारण जो दुकानदार अपने परिवार को समय नहीं दे पाते थे, Lockdown के दौरान वह बच्चों के साथ दिन गुजार रहे है और नित्य नया कर रहे हैं।

कपड़े की दुकान पर नौकरी करने वाले किशोर इसरानी ने बताया कि वह अपने अनुभवों को अपने बच्चों के साथ साझा करते हैंं और रोज कुछ न कुछ नया करते रहते हैं, जिससे बच्चे रचनात्मक बने।

Lockdown के समय का सदुपयोग करते हुए उन्होंने बच्चों से चित्रकारी द्वारा संदेश देने की बात कही, तो बच्चों ने बहुत सुन्दर तरीक़े से पेंटिंग द्वारा घर पर रहने की अपील करते हुए संदेश दिया कि अगर आप अपने परिवार को हमेशा देखना चाहते हैं तो कृपया घर में रहिए।

कदम्ब विहार निवासी किशोर इसरानी ने बताया कि वह रोज परिवार के साथ रामायण और महाभारत के सभी एपीसोड देखते है और शाम को एक घंटा अपने निरंकारी गुरूभाईयों के साथ ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग सत्संग करते हैं, इसके अलावा वह बच्चों के साथ खेलते हैं। बच्चों को अपने द्वारा संग्रहित किए हुए विशेष जानकारियों वाले पुराने अखबार दिखाकर यादें ताजा करते हैं।

उन्होंने बताया कि वह बचपन से अखबारों से जुड़े हैं क्योंकि उनके पिता और भाई समाचार पत्र वितरक का काम करते थे, घर पर सारे ही पत्र-पत्रिकाएं आते थे, जिन्हें वह पूरा-पूरा पढ़ लेते थे, लेकिन 1994 में सिंधी समाज और निरंकारी मिशन का मीडिया प्रभारी बनने के बाद तो वह अखबार पढ़ने के दिवाने हो गए।

किशोर इसरानी ने बताया कि अखबार पढ़ते-पढ़ते वह पाठक से लेखक बन गए, लेकिन अखबार पढ़ने का शौक कम न हुआ, बल्कि और बढ़ गया, फिर तो उन्हें विशेष खबरों और जानकारी वाले अखबार संग्रह करने का शौक ही लग गया जिन्हें लॉकडाउन के दौरान दोबारा देखकर यादें ताजा की।

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