चीन से मदद पाने वाले देशों को आर्मी चीफ ने किया आगाह, कहा कि फ्री में कुछ नहीं मिलता

चीन से मदद पाने वाले देशों को आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने आगाह किया है। रविवार को पुणे में आर्मी चीफ ने कहा कि जिन देशों ने चीन से वित्तीय मदद ली है, उन्हें जल्द ही अहसास हो जाएगा कि कुछ भी फ्री में नहीं मिलता है। वह बिम्सटेक ‘सैन्य अभ्यास 18’ के समापन समारोह से इतर मीडिया को संबोधित कर रहे थे। हाल के वर्षों में नेपाल और चीन के बीच नजदीकी बढ़ी है। इस बाबत पूछे गए सवाल पर जनरल रावत ने कहा, ‘कोई भी देश जो आर्थिक विकास करना चाहता है तो उसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय सहयोग के रास्ते तलाशने पड़ते हैं। चीन के पास पैसा है तो अब वे इसे जमकर खर्च कर रहे हैं लेकिन जो देश ऐसी मदद ले रहे हैं, उन्हें जल्द ही इस बात का अहसास हो जाएगा कि कुछ भी फ्री में नहीं मिलता है।’
आर्मी चीफ ने कहा कि ऐसे संबंध अस्थाई होते हैं और जैसे ही वैश्विक सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य बदलते हैं, ये संबंध भी बदल जाते हैं। जनरल रावत ने कहा, ‘इसका सबसे उपयुक्त उदाहरण अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध है, जो अब वैसा नहीं रहा है जो पहले था। ऐसे में हमें ऐसे अस्थायी अलायंस को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमें अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।’
रावत ने कहा कि नेपाल और भूटान जैसे देशों को भौगोलिक स्थिति की वजह से भारत के प्रति झुकाव रखना होगा। उन्होंने कहा, ‘भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रहा है। भारत पड़ोसी पहले और ऐक्ट ईस्ट के सिद्धांत पर चल रहा है और बिम्सटेक इसका हिस्सा है। हमारा देश बड़ा है। अगर हम इनिशटिव लेते हैं तो दूसरे देश उसका अनुसरण करेंगे।’
उन्होंने कहा कि भारत के आर्थिक प्रतिस्पर्धी देश के तौर पर चीन उभर रहा है। दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में प्रभाव कायम करने के लिए दोनों देश एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। आर्मी चीफ ने कहा कि भारत का आर्थिक विकास आतंकवाद के खतरे को कम करने में मदद करेगा।
आपको बता दें कि एक हफ्ते चले अभ्यास के दौरान बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान, श्री लंका और भारत के सैनिकों ने हिस्सा लिया। थाइलैंड ने भी अपने पर्यवेक्षकों की टीम भेजी थी। हालांकि नेपाल की आर्मी ने अभ्यास में हिस्सा नहीं लिया लेकिन उन्होंने पर्यवेक्षकों की टीम भेजी थी। रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा कि जब अभ्यास शुरू हुआ, उसी समय नेपाल आर्मी के कमांड में बदलाव हुआ था फिर भी उन्होंने पर्यवेक्षक भेजे थे। हमें अटकलों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
-एजेंसियां

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