एप्पल ने फ्लैगशिप iPhone11 का भारत में प्रोडक्शन शुरू किया

आईफोन बनाने वाली अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी एप्पल ने अपने फ्लैगशिप iPhone11 का भारत में प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। यह पहला मौका है जब कंपनी भारत में अपना कोई टॉप मॉडल बना रही है। चेन्नई के करीब स्थित फॉक्सकॉन के प्लांट में यह फोन बनाया जा रहा है। इससे सरकार की मेक इन इंडिया मुहिम को बल मिलेगा।
इंडस्ट्री के दो सीनियर अधिकारियों ने कहा कि इसका उत्पादन चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा और एप्पल भारत में बने आईफोन11 के निर्यात पर विचार कर सकती है। इससे कंपनी की चीन पर निर्भरता कम होगी। हालांकि कंपनी ने आईफोन11 हैंडसेट की कीमत कम नहीं की है क्योंकि वह चीन में बने हैंडसेट भी भारत में बेचती है लेकिन बाद में इसकी कीमत कम की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन से उसे 22 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी की बचत होगी।
चीन पर कम होगी निर्भरता
अधिकारियों के मुताबिक एप्पल बेंगलूरु के करीब विस्ट्रॉन प्लांट में अपना नया iPhone SE बनाने की योजना बना रही है। इस यूनिट में iPhone SE का पिछला मॉडल बनता था जिसे वापस ले लिया गया था। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम का फायदा उठाने के लिए एप्पल भारत में अपना उत्पादन बढ़ा रही है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे कंपनी को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी क्योंकि अमेरिका और चीन के संबंध इस समय अच्छे नहीं चल रहे हैं।
इस बारे में एप्पल इंडिया ने उसे भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। इससे पहले ईटी ने खबर दी थी कि एप्पल की भारत में उत्पादन बढ़ाने की योजना है। कंपनी की एक और कॉन्टैक्ट मैन्यूफेक्चरर कंपनी पेगाट्रोन ने हाल में भारत में सहयोगी कंपनी के तौर पर पंजीकरण कराया था।
एप्पल का भारत में कारोबार
एप्पल ने सितंबर में तीन नए मॉडल लॉन्च किए थे जिनमें से आईफोन11 की भारत में सबसे अधिक बिक्री हुई है। अधिकारियों की मानें तो देश में बने मॉडल पहले ही स्टोर्स में पहुंच चुके हैं। एप्पल भारत में दो और हैंडसेट मॉडल बनाती है। iPhone XR फॉक्सकॉन के प्लांट में और iPhone7 विस्ट्रॉन की फैक्ट्री में बनता है।
एप्पल इंडिया का 2018-19 में रेवेन्यू 10538 करोड़ रुपये और प्रोफिट 262 करोड़ रुपये रहा था। आईडीसी इंडिया के मुताबिक जनवरी-मार्च के दौरान भारतीय बाजार में उसकी हिस्सेदारी 2-3 फीसदी थी। लेकिन प्रीमियम सेगमेंट (500 डॉलर और उससे अधिक) में कंपनी की हिस्सेदारी 62.7 फीसदी थी।
-एजेंसियां

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