नवलखा की याचिका सुनने से एक और जज का इंकार

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट के एक और जज जस्टिस रवींद्र भट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। भट ऐसा करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांचवें जज हैं। इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस बी आर गवई समेत चार जज इस केस की सुनवाई से हट चुके हैं। पांचवें जज के केस से हटने के कारण सुप्रीम कोर्ट में इस केस पर आज भी सुनवाई नहीं हो पाई। इस तरह नवलखा को वहां से आज भी राहत नहीं मिली।
नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट से इस केस में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह कल यानी 4 अक्टूबर को नवलखा की याचिका पर सुनवाई करेगा। नवलखा की गिरफ्तारी पर लगी रोक भी 4 अक्टूबर को ही खत्म हो रही है।
गौरतलब है कि पुणे पुलिस ने पिछले साल नक्सलियों से संपर्क और भीमा-कोरेगांव और एल्गार परिषद के मामलों में नवलखा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 13 सितंबर को नवलखा की याचिका खारिज कर दी थी।
बंबई हाईकोर्ट में याचिका खारिज किए जाने के तुरंत बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ नवलखा की जमानत याचिका पर सुनवाई बिना दूसरे पक्ष को सुने नहीं की जाए। नवलखा और नौ अन्य मनावाधिकार कार्यकर्ताओं एवं सिविल लिबर्टीज कार्यकर्ताओं को पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद में उनकी भूमिका के लिए भारत के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था।
इस आयोजन के एक दिन बाद 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में जातीय दंगे भड़के थे। इन सबके अलावा इन पर कथित तौर पर प्रतिबंधित माओवादी-कम्युनिस्ट पार्टी के साथ संबंध होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या व चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं।
-एजेंसियां

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