बंद होने जा रही है अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन

नई दिल्‍ली। भारी कर्ज में डूबे अनिल अंबानी की दिवालिया हो चुकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन बंद होने के कगार पर पहुंच गई है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के फैसले को नहीं पलटा तो कंपनी के पास बंद होने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। अगर ऐसा होता है तो इससे उन बैंकों को भारी नुकसान होगा जिन्होंने आरकॉम को कर्ज दे रखा है।
एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा है कि कंपनी के पास मौजूद स्पेक्ट्रम को सरकारी बकाया क्लीयर करने के बाद इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के तहत बेचा जा सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक एक बैंकिंग सोर्स ने बताया कि आरकॉम की कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स इस आदेश के खिलाफ एक अपील दायर करेगी। एनसीएलएटी ने एयरसेल वर्सेज डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस मामले में यह आदेश दिया है।
जानकारों का कहना है कि एनसीएलएटी के आदेश के बाद एयरसेल के लिए UV Asset Reconstruction Company (UVARCL) के रिजॉल्यूशन प्लान का कोई मतलब नहीं रह गया है। इस प्लान को पिछले साल जून में मंजूरी दी गई थी। कंपनी अब बंद हो जाएगी और लेंडर्स को अपने 18,000 करोड़ रुपये के बकाए में से फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी। एक बैंकर ने कहा कि आरकॉम का भी यही हश्र होगा जिसे डेट रिजॉल्यूशन के लिए एनसीएलटी में भेजा गया था। कंपनी ने 46,000 करोड़ रुपये के कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट किया था। UVARCL ने आरकॉम और रिलायंस टेलिकॉम (RTL) के एसेट्स के लिए सफल बोली लगाई थी। इसमें स्पेक्ट्रम और रियल एस्टेट शामिल थे।
बैंकों को होगा 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान
एनसीएलएटी ने पिछले हफ्ते अपने फैसले में कहा था कि लेंडर्स स्पेक्ट्रम को सिक्योरिटी इंटरेस्ट की तरह नहीं देख सकते हैं। हालांकि ट्रिब्यूनल ने कहा कि सरकार एक ऑपरेशनल क्रेडिटर है। साफ है कि ऑपरेशनल क्रेडिटर के तौर पर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस फाइनेंशियल क्रेडिटर्स से पहले एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) वसूल नहीं कर सकता है। एयरसेल और आरकॉम पर एजीआर के रूप में क्रमशः 12,389 करोड़ रुपये और 26,000 करोड़ रुपये बकाया है। आरकॉम और आरटीएल के रिजॉल्यूशन प्लान को लेंडर्स ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी और इसे मार्च 2020 से एनसीएलटी की मंजूरी का इंतजार है।
आरकॉम और आरटीएल के बंद होने से 38 बैंकों को 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। चाइना डेवलपमेंट बैंक की अगुवाई में चीन के बैंकों को भी 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। एसबीआई को 3,000 करोड़ रुपये और एलआईसी को 3,700 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। बैंकों को जून 2017 से आरकॉम से एक पैसा भी नहीं मिला है। अब उनकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर है।
-एजेंसियां

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