अगले दलाई लामा के चयन पर अमेरिका और चीन आमने-सामने, भारत की भी पैनी नजर

तेनजिन ग्यात्सो… जिन्हें हम 14वें दलाई लामा के नाम से जानते हैं, वे इस साल जुलाई में 86 साल के हो जाएंगे। उनकी बढ़ती उम्र और खराब होती सेहत के बीच अगले दलाई लामा के चुनाव को लेकर भी घमासान मचा हुआ है। तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा को एक जीवित बुद्ध माना जाता है जो उनकी मृत्यु के बाद पुनर्जन्म लेते हैं। परंपरागत रूप से जब किसी बच्चे को दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में चुन लिया जाता है, तब वह अपनी भूमिका को निभाने के लिए धर्म का विधिवत अध्ययन करता है। वर्तमान दलाई लामा की पहचान उनके दो साल के उम्र में की गई थी।
चीन खुद चुनना चाहता है अगला दलाई लाम
चीन ने ऐसे संकेत दिए हैं कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन चीन ही करेगा। चीन की इन चालाकियों को देखते हुए दलाई लामा नजदीकियों ने पहले ही बताया है कि परंपरा को तोड़ते हुए वे खुद अपने उत्तराधिकारी का चयन कर सकते हैं। अमेरिका पहले ही इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सामने रखने की मांग कर चुका है। इस पूरे मामले पर अमेरिका और भारत की पहले से नजर है। पिछले साल US दूत सैम ब्राउनबैक ने धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की थी। 84 वर्षीय दलाई लामा से मीटिंग के बाद ब्राउनबैक ने बताया था कि दोनों के बीच उत्तराधिकारी के मामले पर लंबी चर्चा हुई थी।
दलाई लामा के इस बयान से चिढ़ा है चीन
दलाई लामा के 2019 में बयान दिया था कि उनका उत्तराधिकारी कोई भारतीय हो सकता है। इस बात पर चीन को मिर्ची लग गई थी। उसने कहा था कि नए लामा को उनकी सरकार से मान्यता लेनी ही होगी। तिब्बती समुदाय के अनुसार लामा, ‘गुरु’ शब्द का मूल रूप ही है। एक ऐसा गुरु जो सभी का मार्गदर्शन करता है लेकिन यह गुरु कब और कैसे चुना जाएगा, इन नियमों का पालन आज भी किया जाता है।
1959 में भारत पहुंचे थे दलाई लामा
कहा जाता है कि जब तिब्बत पर चीन ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया था, तब 1959 में अमेरिकी खुफिया एजेंटों ने तत्कालीन दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश के जरिए भारत पहुंचा दिया था। आज भी दलाई लामा और तिब्बत की पूरी निर्वासित सरकार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रहती है। इस बात को लेकर चीन कई बार नाराजगी भी जता चुका है।
दलाई लामा को लेकर अमेरिका और चीन में विवाद
दलाई लामा को लेकर अमेरिका और चीन में काफी समय से विवाद जारी है। वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन तिब्बत में चीन के मानवाधिकार हनन को लेकर काफी मुखर हैं। तिब्बत और शिनजियांग को लेकर अमेरिका ने चीन पर कई कड़े प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। 2020 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बौद्ध धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु के चयन में चीनी हस्तक्षेप को रोकने के लिए नई तिब्बत नीति (तिब्बती नीति एवं समर्थन कानून 2020) को मंजूरी दी थी। इसमें तिब्बत में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास स्थापित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की बात की गई है।
‘दलाई लामा के चयन में चीन न करे दखलअंदाजी’
अमेरिका पहले से ही कहता आया है कि अगले दलाई लामा का चयन केवल तिब्बती बौद्ध समुदाय के लोग करें एवं इसमें चीन का कोई हस्तक्षेप नहीं हो। चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी सीनेट ने 2020 में तिब्बती नीति को सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कानून में तिब्बतियों को उनके आध्यात्मिक नेता का उत्तराधिकारी चुनने के अधिकार को रेखांकित किया गया है और तिब्बत के मुद्दों पर एक विशेष राजनयिक की भूमिका का विस्तार किया गया है।
दलाई लामा को चुनने में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा चीन
तिब्बत पर कब्जे के 70 साल बाद भी चीन की पकड़ उतनी मजबूत नहीं हो पाई है, जितना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी चाहती है। इसी कारण जिनपिंग प्रशासन अब तिब्बत में धर्म का कार्ड खेलने की तैयारी कर रहा है। तिब्बत में बौद्ध धर्म के सबसे ज्यादा अनुयायी रहते हैं जबकि चीन की कम्युनिस्ट सरकार किसी भी धर्म को नहीं मानती है इसलिए यहां के लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए चीन अब पंचेन लामा का सहारा लेने की तैयारी कर रहा है।
पंचेन लामा को दलाई लामा बनाना चाहता है चीन
तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा के बाद दूसरा सबसे अहम व्यक्ति पंचेन लामा को माना जाता है। उनका पद भी दलाई लामा की तरह पुनर्जन्म की आस्था पर आधारित है। तिब्बती बौद्ध धर्म के दूसरे सबसे अहम व्यक्ति पंचेन लामा की 1989 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। कुछ लोगों का मानना है कि चीन सरकार ने उन्हें जहर दिलवाया था। जिसके बाद से उनका जल्द ही दूसरा अवतार लेने की उम्मीद जाहिर की गई थी।
दलाई लामा ने नए पंचेन लामा को पहचाना
दलाई लामा ने 14 मई 1995 को नए पंचेन लामा को पहचाने जाने का ऐलान किया था। उन्होंने छह साल के गेझुन चोएक्यी न्यीमा को पंचेन लामा का अवतार घोषित किया। वो तिब्बत के नाक्शु शहर के एक डॉक्टर और नर्स के बेटे थे। जिसके बाद चीन ने तत्कालीन गेझुन चोएक्यी न्यीमा के पूरे परिवार को ही गायब कर दिया।
चीन ने अपना पंचेन लामा घोषित किया
पंचेन लामा के परिवार को गायब करने के बाद चीन सरकार ने अपने प्रभाव वाले बौद्ध धर्मगुरुओं से ऐसे पंचेन लामा की पहचान करने के लिए कहा जो चीन के इशारे पर चले। जिसके बाद चीन ने गाइनचेन नोरबू को आधिकारिक पंचेन लामा घोषित कर दिया। अब विशेषज्ञ बता रहे हैं कि चीन समर्थित पंचेन लामा इस क्षेत्र में कम्युनिस्ट पार्टी के शासन में एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
-एजेंसियां

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