आगरा: घोषणा के बाद भी नहीं बना बाईपास, ADF पहुंचा कोर्ट

आगरा। आगरा में उत्तरी बाईपास को लेकर अब आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। हालांक‍ि सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व में दो बार द‍िए गए आदेश (पहला दिनांक 30.12.1996 एवं दूसरा 07.08.2006 ) के बाद भी आगरा के उत्तरी बाईपास का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। इसके कारण बड़ी संख्या में डीजल के भारी वाहन शहर से होकर गुजरते हैं जो कि यहां की वायु को प्रदूषित करते हैं।

गौरतलब है क‍ि केन्द्रीय परिवहन मंत्री न‍ित‍िन गडकरी ने 10 दिसम्बर 2016 को उत्तरी बाईपास के निर्माण की घोषणा आगरा जनसभा में की थी लेकिन उसके बावजूद उत्तरी बाईपास अभी तक नहीं बन सका है।

अब राज्य सरकार व केन्द्र सरकार को पक्षकार बनाकर आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (एडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में दिनांक 17.10.2020 को याचिका सं0 107646 वर्ष 2020 दायर करते हुए कहा है कि केन्द्र सरकार का परिवहन मंत्रालय लगभग 24 किलोमीटर लम्बा आगरा का उत्तरी बाईपास बनाये जो राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 19 (आगरा-दिल्ली रोड) एवं राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 509 (आगरा-अलीगढ़ रोड) को जोड़ दे।

एडीएफ ने अपनी याचिका में यह मांग भी की है कि डीजल चलित भारी वाहन जो आगरा में माल को उतारते या चढ़ाते नहीं ह,ै उन्हें भी रात्रि में यमुना किनारा मार्ग व महात्मा गांधी मार्ग से गुजरने न दिया जाये जैसा कि दिल्ली में भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गुजरने वाले भारी वाहन प्रवेश नहीं कर सकते हैं।

एडीएफ के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0 जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गयी याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश दिनांक 30.12.1996 में यह निदेश दिया था कि आगरा का बाईपास का निर्माण हो ताकि आगरा से गुजरने वाला सारा यातायात दूसरे मार्ग पर ले जाया जाये। उक्त आदेश के उपरान्त 7 अगस्त 2006 को पुनः सुप्रीम कोर्ट ने बाईपास निर्माण के सम्बन्ध में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी लेकिन इस सबके बावजूद भी उत्तरी बाईपास का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है और भारी वाहन बाईपास रोड से दिन रात गुजरते रहते हैं।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार द्वारा आगरा-दिल्ली मार्ग को आगरा-अलीगढ़ मार्ग से जोड़ने की जरूरत को शहरी नियोजन व आवास विभाग लखनऊ द्वारा स्वीकर किया गया और आगरा विकास प्राधिकरण को कार्यालय ज्ञाप दिनांक 14 फरवरी 2011 से पीपीपी माॅडल पर उत्तरी बाईपास बनाने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को नोडल एजेंसी भी बनाया गया था लेकिन राज्य सरकार द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी। केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने आगरा में हुई आम सभा में 10 दिसम्बर 2016 को उत्तरी बाईपास बनाने की घोषणां की लेकिन अभी तक उत्तरी बाईपास बनाने की कोई ठोस योजना सामने नहीं आ सकी है।

एडीएफ के सचिव जैन ने बताया कि याचिका में यह भी कहा गया कि आगरा के एअर एक्शन प्लाॅन में बाईपास निर्माण की बात कही गयी है ताकि जिन वाहनों को माल आगरा से लाना या ले जाना नहीं है ऐसे वाहनों से होने वाले प्रदूषण से बचा जा सके। यह एअर एक्शन प्लाॅन 1 जून 2019 को लागू कर दिया गया जिसमें बाईपास बनाने के लिए 360 दिनों की अवधि थी जो कि अब गुजर चुकी है। यही नहीं, आगरा-कानपुर रोड (एनएच-19) भी आगरा शहर की घनी आबादी से होकर गुजरता है और अनेक चैराहों जैसे सिकन्दरा, कामायनी, गुरू का ताल, भगवान टाॅकीज अब्बु लाला की दरगाह, सुल्तानगंज, वाटरवकर््स व रामबाग पर काफी ट्रैफिक जाम रहता है और सड़क हादसे भी वहां आये दिन होते हैं। नो एन्ट्री खुलने पर यमुना किनारा मार्ग पर भी रात को भारी वाहन खुलने पर निकलते हैं जिन्हें लोडिंग व अनलोडिंग नहीं करनी होती है। ऐसे डीजल चलित भारी वाहन आगरा किला व ताजमहल दोनो को ही वायु प्रदूषण से नुकसान पहुँचाते हैं। यमुना किनारा मार्ग व महात्मा गांधी मार्ग से ऐसे वाहनों को रात्रि में न गुजरने दिया जाये और उन्हें वैकल्पिक मार्ग से जाने के लिए कहा जाये।

याचिका में यह भी कहा है कि आगरा में ताजमहल के सम्बन्ध में आईआईटी कानपुर ने जो रिपोर्ट (फरवरी 2019) दी है, उसमें वाहनों व सड़कों से उठने वाले धूल के कणों को ही वायु प्रदूषण का मुख्य कारण माना है। आईआईटी रिपोर्ट को भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका के साथ एडीएफ द्वारा दाखिल किया गया है। आगरा नगर निगम परिसर में आॅटोमेटिक एअर माॅनिटरींग स्टेशन लगा हुआ है और महात्मा गांधी मार्ग के सहार्रे िस्थत यह परिसर है जिसके कारण रात्रि में गुजरने वाल भारी वाहनों से प्रदूषण बढ़ता है और एअर क्वालिटी इन्डेक्स (एक्यूआई) खराब हो जाती है। यदि महात्मा गांधी मार्ग व यमुना किनारा मार्ग पर भारी वाहनों का रात्रि में आवागमन रोक दिया जाये तो वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार आयेगा और इन भारी वाहनों के कारण होने वाले सड़क हादसों में भी कमी आयेगी।

एडीएफ की ओर से यह आशा व्यक्त की गयी है कि सुप्रीम कोर्ट के 1996 व 2006 के आदेशों के दृष्टिगत यह याचिका स्वीकार होगी और आगरा में ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क हादसों और वायु प्रदूषण सभी में सकारात्मक सुधार आ सकेगा। इससे पूर्व भी एडीएफ सुप्रीम कोर्ट में यमुना की डिसील्टींग आदि महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अनेक याचिकाऐं दायर की हुई हैं जिसमें केन्द्र सरकार व अन्य विभागों को नोटिस भी जारी हो चुके हैं।
-Legend News

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