मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर आगरा में की गई वेबिनार

आगरा। वर्तमान में मानसिक समस्याओं के लिए मनोवैज्ञानिक से यदि कोई परामर्श लेता है तो लोग अच्छी दृष्टि से नहीं देखते हैं और इसी कारण से लोग अपनी मानसिक बीमारियों को छिपाते हैं और खुलकर उस पर बात नहीं करना चाहते हैं। अनेक बार यही आत्महत्या की दुःखद घटना बन जाता है। मानसिक स्वास्थ्य भी हमारे लिये उतना ही जरूरी है जितना कि हमारा शारीरिक स्वास्थ्य। यह बात अभी हाल में हुयी वेबिनार (webinar) में विचार मंथन में निकलकर आयी जो कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (Agra Development Foundation) ADF द्वारा की गई थी।

विषय प्रवर्तन करते हुए एडीएफ सचिव के0सी0 जैन ने कहा कि आत्महत्या केवल एक व्यक्ति की ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज की अपूर्णनीय क्षति होती है और ऐसी घटनाऐं परिवार में भूचाल ले आती हैं। इन घटनाओं को हमें समाज में जागृति व मनोवैज्ञानिकों की सहायता से रोकना चाहिये।

वेबिनार के मुख्य वक्ता व लाइफ कोच (Life Coach) डाॅ0 नवीन गुप्ता ने बताया कि अमेरिका में 48 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारियों की दवाईयां ले रहे हैं ऐसी स्थिति में उसे कैसे खुशहाल देश कहा जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति हम जागरूक नहीं हैं और मनोवैज्ञानिक की सहायता लेने में बहुत देर कर देते हैं। तनाव जीवन में जरूरी है लेकिन जब तनाव अधिक हो तो उसे कैसे कम किया जाये यह हमें सीखना होगा और तनाव सहने की शक्ति को बढ़ाना भी होगा। मानसिक तनाव कैसे कम किया जाये इसके लिए उन्होंने टू-विन्डो थ्योरी बताई एक ऐसी लाल खिड़की जिससे दिखता बहुत है लेकिन हम कुछ कर नहीं सकते हैं उसे हमें छोड़ देना चाहिये और दूसरी हरी खिड़की जिससे दिखता है और जिसके सम्बन्ध में हम कुछ कर सकते हैं। उसको करने के लिए हमें प्रयास करना चाहिये न कि उन चीजों के लिये जिन प् हमारा वश न हो।

जापान के ”भड़ास कैफे“ का भी उन्होंने सन्दर्भ दिया जहां पर जाकर लोग अपना गुस्सा और भड़ास निकालने के लिए पैसा देते हैं और तोड़-फोड़ करते हैं जो कि दिखाता है कि हमें अपने मन की भावनाओं को बहुत दबाकर नहीं रखना चाहिये। अपने से सेल्फ-टाॅक भी करनी चाहिये, हर चीज में अपने को दोषी मानना या किसी चीज को ज्यादा बड़े रूप में देखना या हमेशा खतरे ही खतरे के बारे में सोचना मानसिक बीमारी पैदा करता है। हमें 360 डिग्री से सभी समस्याओं का मूल्यांकन करना चाहिये। हमें अपने अन्दर के डरों को पहचानना चाहिये। हर मानसिक रोगी का ईलाज अलग-अलग उसकी बीमारी को देखकर मनोवैज्ञानिक करता है।

न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा ने कहा कि मानसिक बीमारियां उचित परामर्श से दूर हो सकती हैं और आपराधिक मामलों का विश्लेषण मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी करना आवश्यक है ताकि अपराध के मूल कारणों को जाना जा सके। जज प्रवीन कुमार ने कहा कि मानसिक बीमारी के व्यक्ति को फस्ट-एड के रूप में हमारी सहानुभूति और संवेदना की जरूरत है। मानसिक रोगों से मुक्ति के लिये हमें दोस्त (हमदम) बनाने चाहिये और फाटोग्राफी, लेखन, गार्डनिंग, कुकिंग आदि शौक पूरे करने चाहिये।

अलीगढ़ से प्रो0 एस0एन0 खान ने आत्महत्या का एक प्रमुख कारण उपलब्धियों में नाकामयाब होना बताया और उपलब्धियों से जरूरत से ज्यादा जुड़ा होने की बात रखी। रेलवे दुर्घटना में इंजन ड्राइवर की भूमिका को मनोवैज्ञानिक समस्या बताया। ग्रेटर नोएडा से शारदा विश्वविद्यालय के बाई0के0 गुप्ता द्वारा कहा गया कि संयुक्त परिवारों का टूटना और एकल परिवार मानसिक बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण है। स्कूल और काॅलेजों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की ओर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिये। एडीएफ सचिव जैन ने मानसिक बीमारियों को लेकर और अधिक वेबिनार और कार्यशालाऐं आयोजित करने की आवश्यकता को कहा।

वेबिनार में श्वेता गुप्ता, शुभम अग्रवाल, अमोल रंजन, चित्रा जैन, राजीव गुप्ता, नन्द किशोर शर्मा, सुनील खेत्रपाल, सुधीर जौहरी, प्रमोद अग्रवाल आदि सम्मिलित हुए।

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