कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में उठने लगे अलग-अलग सुर

नई दिल्‍ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन में अब अलग-अलग सुर उठने लगे हैं। ऐसे में आंदोलन का नेतृत्‍व करने वालों को भी चिंता होने लगी है कि कहीं आंदोलन पटरी से न उतर जाए। गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्‍टर रैली को लेकर बयानबाजी को किसान संघर्ष समिति ने गलत ठहराया है। संगठन की हरियाणा इकाई के संयोजक मनदीप नथवान ने कहा कि ‘ऐसा कहा जा रहा है कि किसान लाल किले पर तिरंगा फहराएंगे और (26 जनवरी को) एक साथ ट्रैक्‍टर और टैंक निकलेंगे। ऐसे बयान किसानों के हित में नहीं हैं।’ उन्‍होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ‘सरकार की शह पर आंदोलन को हिंसक’ बनाना चाहते हैं।
राकेश टिकैत ने दिया था ऐसा बयान
भारतीय किसान यून‍ियन BKU के प्रवक्‍ता राकेश टिकैत ने 14 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर मार्च को लेकर बयान दिया था। उन्‍होंने कहा था कि 26 जनवरी को ऐतिहासिक नजारा होगा जब एक तरफ किसान होंगे और दूसरी तरफ जवान। उन्‍होंने कहा था कि ‘दोनों अमर जवान ज्‍योति पर मिलेंगे जहां किसान तिरंगा फहराएंगे।’
टिकैत के मुताबिक “26 जनवरी के लिए हमारा प्‍लान है कि हम लाल किले से इंडिया गेट तक जुलूस निकालेंगे।”
दिल्‍ली में बड़े ट्रैक्‍टर मार्च की तैयारी
किसान संगठनों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी में बड़ी संख्‍या में ट्रैक्‍टर्स का मार्च निकालने का प्‍लान बनाया है। लुधियाना में भी तैयारियां चल रही हैं। ट्रैक्टर मार्च में हिस्सा ले रहे एक प्रदर्शनकारी ने बताया, “24 जनवरी से पहले हमने एक लाख ट्रैक्टर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है, सब एकजुट होकर काम कर रहे हैं।” उन्‍होंने कहा कि ‘यह आंदोलन सरकार के खिलाफ है, दिल्‍ली के नहीं। हमें संयुक्‍त किसान मोर्चा की बनाई रणनीति को लागू करना चाहिए और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखना चाहिए।”
ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने काह कि “करीब दो महीने से हम कष्‍ट झेल रहे हैं और ठंड में मर रहे हैं। सरकार हमें ‘तारीख पे तारीख’ दिए जा रही है और टाल रही है ताकि हम थक जाएं और जगह खाली कर दें। यह उनकी साजिश है।”
सोमवार को SC में होनी है सुनवाई
तीनों कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली और दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर डेरा डाले किसानों को हटाने संबंधी याचिकाओं पर SC में सोमवार को सुनवाई हो सकती है। 12 जनवरी को शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी। किसानों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को कहा था सुप्रीम कोर्ट की गठित चार सदस्यीय समिति उन्हें स्वीकार्य नहीं है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने SC की कमेटी से अपना नाम वापस ले लिया था।
-एजेंसियां

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