शस्त्र पूजा के बाद संघ प्रमुख भागवत ने कहा, भारतीय सेना की अदम्‍य वीरता का अहसास चीन को हो गया है

नागपुर। आज देश भर में विजया दशमी मनाई जा रही है। विजयादशमी को ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS का स्थापना दिवस भी होता है। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर शस्त्र पूजा की। इसके बाद मोहन भागवत ने स्वयं सेवकों को संबोधित किया। अपने संबोधन में मोहन भागवत ने राम मंदिर, नागरिकता संशोधन कानून (CAA), कोरोना संकट, चीन के साथ विवाद, नई शिक्षा नीति, नए कृषि कानून, पारिवारिक चर्चा के महत्व और स्वदेशी नीति के तहत ‘वोकल फॉर लोकल’ के मुद्दे पर खुल कर अपनी बात रखी।
नई पीढ़ी के साथ चर्चा जरूरी
युवाओं का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि अगर हम चाहते हैं कि युवा पीढ़ी हमारी बातों को सुने, उस पर अमल करे तो हमें उनके साथ चर्चा करनी पड़ेगी। अगर हम उनसे चर्चा किए बिना कुछ करते हैं तो जब तक उनकी मजबूरी रहेगी तब तक ही वे बात पर अमल करेंगे लेकिन अगर हम चर्चा करेंगे तो वे दिल से उसे स्वीकार करेंगे।
हफ्ते में कम से कम एक बार परिवार के साथ करें चर्चा
मोहन भागवत ने चर्चा पर जोर देते हुए कहा कि सप्ताह में एक बार हम अपने परिवार में सब लोग मिलकर श्रद्धानुसार भजन व इच्छानुसार आनन्दपूर्वक घर में बनाया भोजन करने के पश्चात् 2-3 घण्टों की गपशप के लिए बैठ जाएं और पूरे परिवार में आचरण का संकल्प लेकर उसको परिवार के सभी सदस्यों के आचरण में लागू करें।
प्लास्टिक के पूरी तरह से त्यागने के लिए पारिवारिक स्तर पर हो चर्चा
मोहन भागवत ने कहा, ‘पर्यावरण का विषय सर्वस्वीकृत व सुपरिचित होने से अपने घर में पानी को बचाकर उसका उपयोग, प्लास्टिक का पूर्णतया त्याग करके व घर के आंगन में, गमलों में हरियाली, फूल,सब्जी बढ़ाने से लेकर वृक्षारोपण के उपक्रम कार्यक्रम तक कृति की चर्चा भी सहज व प्रेरक बन सकती है।’
मोहन भागवत ने आगे कहा, ‘समाज के सभी जाति, भाषा, प्रांत, वर्गों में हमारे मित्र व्यक्ति व मित्र कुटुम्ब हैं कि नहीं? हमारा तथा उनका सहज आने-जाने का, साथ उठने-बैठने, खाने-पीने का सम्बन्ध है कि नहीं, यह सामाजिक समरसता की दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण आत्मचिंतन कुटुम्ब में हो सकता है।’
मोहन भागवत ने नई शिक्षा नीति का स्वागत किया
विजयादशमी पर अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा, ‘अर्थ, कृषि, श्रम, उद्योग तथा शिक्षा नीति में स्व को लाने की इच्छा रख कर कुछ आशा जगाने वाले कदम अवश्य उठाए गए हैं। व्यापक संवाद के आधार पर एक नई शिक्षा नीति घोषित हुई है। उसका संपूर्ण शिक्षा जगत से स्वागत हुआ है, हमने भी उसका स्वागत किया है।’
‘वोकल फॉर लोकल’ स्वदेशी की नीति से भरा हुआ है
मोहन भागवत ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए स्वदेश की नीति आवश्यक है और ‘वोकल फॉर लोकल’ स्वदेशी की नीति से भरा हुआ है। इसके जरिए हम अपनी स्वदेशी की भावना को आगे बढ़ा सकते हैं और इसे पूरा कर सकते हैं।
भागवत ने कहा- ‘यह स्वदेशी संभावनाओं वाला उत्तम प्रारंभ है परन्तु इन सबका यशस्वी क्रियान्वयन पूर्ण होने तक बारीकी से ध्यान देना पड़ेगा इसीलिये स्व या आत्मतत्त्व का विचार इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में सबने आत्मसात करना होगा,तभी उचित दिशा में चलकर यह यात्रा यशस्वी होगी।’
जैविक कृषि हमेशा से हमारी परंपरा रही है
मोहन भागवत ने कहा कि कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हमें स्वदेशी कृषि नीति अपनानी होगी। उन्होंने कहा- कृषि नीति का हम निर्धारण करते हैं तो उस नीति से हमारा किसान अपने बीज स्वयं बनाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। हमारा किसान अपने को आवश्यक खाद, रोग प्रतिकारक दवाइयाँ व कीटनाशक स्वयं बना सके या अपने गाँव के आस-पास पा सके यह होना चाहिए।
मोहन भागवत ने आगे कहा, ‘हमारा कृषि का अनुभव गहरा व्यापक व सबसे लम्बा है इसलिये उसमें से काल सुसंगत, अनुभव सिद्ध, परंपरागत ज्ञान तथा आधुनिक कृषि विज्ञान से देश के लिये उपयुक्त व सुपरीक्षित अंश, हमारे किसान को अवगत कराने वाली नीति हो।’
‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ कहने वाले कर रहे हैं षड्यंत्र
टुकड़े-टुकड़े गैंग का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भारत की विविधता के मूल में स्थित शाश्वत एकता को तोड़ने का घृणित प्रयास, हमारे तथाकथित अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को झूठे सपने तथा कपोल कल्पित द्वेष की बातें बता कर चल रहा है।’
भारत तेरे टुकड़े होंगे’ ऐसी घोषणाएं करने वाले लोग इस षड्यंत्रकारी मंडली में शामिल हैं।
राजनीतिक स्वार्थ, कट्टरपन व अलगाव की भावना, भारत के प्रति शत्रुता तथा जागतिक वर्चस्व की महत्वाकांक्षा, इनका एक अजीब सम्मिश्रण भारत की राष्ट्रीय एकात्मता के विरुद्ध काम कर रहा है।
भागवत ने बताया, क्या होता है हिन्दू का वास्तविक मतलब
हिन्दू शब्द को परिभाषित करते हुए मोहन भागवत ने कहा- समस्त राष्ट्र का जीवन सामाजिक व सांस्कृतिक है इसलिए उसके समस्त क्रियाकलापों को दिग्दर्शित करने वाले मूल्यों का व उनकी व्यक्तिगत, पारिवारिक, व्यवसायिक और सामाजिक जीवन में अभिव्यक्ति का नाम ‘हिन्दू’ शब्द से निर्दिष्ट होता है।
हिन्दू होने के लिए अपनी कोई विशेषता नहीं छोड़नी पड़ती
मोहन भागवत ने कहा, ‘हिन्दू’ शब्द की भावना की परिधि में आने व रहने के लिए किसी को अपनी पूजा, प्रान्त, भाषा आदि कोई भी विशेषता छोड़नी नहीं पड़ती। केवल अपना ही वर्चस्व स्थापित करने की इच्छा छोड़नी पड़ती है। स्वयं के मन से अलगाववादी भावना को समाप्त करना पड़ता है। भारत की भावनिक एकता व भारत में सभी विविधताओं का स्वीकार व सम्मान की भावना के मूल में हिन्दू संस्कृति, हिन्दू परम्परा व हिन्दू समाज की स्वीकार प्रवृत्ति व सहिष्णुता है।’
भागवत ने चीन को दिखाया आईना
चीन पर निशाना साधते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हम शांत रहते हैं इसका मतलब यह नहीं कि हम दुर्बल हैं। इस बात को एहसास तो अब चीन को भी हो गया होगा लेकिन ऐसा नहीं है कि इसके बाद हम लापरवाह हो जाएं। ऐसे खतरों पर हमें नजर बनाए रखनी होगी।
मोहन भागवत ने सेना के पराक्रम पर बोलते हुए कहा कि हमारी सेना की अटूट देशभक्ति व अदम्य वीरता, हमारे शासनकर्ताओं का स्वाभिमानी रवैया तथा हम सब भारत के लोगों के दुर्दम्य नीति-धैर्य का परिचय चीन को पहली बार मिला है।
मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी से मित्रता चाहते हैं। वह हमारा स्वभाव है परन्तु हमारी सद्भावना को दुर्बलता मानकर अपने बल के प्रदर्शन से कोई भारत को चाहे जैसा नचा ले, झुका ले, यह हो नहीं सकता। इतना तो अब तक ऐसा दुःसाहस करने वालों को समझ में आ जाना चाहिए।
चीन की विस्तारवादी नीति को दुनिया जानती है
मोहन भागवत ने कहा कि चीन के विस्तारवादी स्वभाव को सब जानते हैं। इस बार उसने एक साथ ताइवान, वियतनाम, अमेरिका, जापान और भारत के साथ-साथ झगड़ा मोल लिया। लेकिन इस बार अंतर है। इस बार भारत ने उसको जो प्रतिक्रिया दी, उसके कारण वह सहम गया। उसको धक्का मिला क्योंकि भारत तन के खड़ा हो गया। भारत की सेना ने अपनी वीरता का परिचय दिया, भारत के नागरिकों ने अपनी देशभक्ति का परिचय दिया।
चीन को दुनिया अब डांटने लगी है
नागपुर में आरएसएस हेडक्वार्टर में अपने संबोधन पर सर संघ संचालक मोहन भागवत ने कहा कि सामरिक और आर्थिक दृष्टि से वह ठिठिक जाए इतना धक्का तो उसे मिला है। इसके कारण दुनिया के बाकी देशों ने भी चीन को अब डांटना शुरू किया है। उसके सामने खड़ा होना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इसके कारण अब और सजगह रहने की जरूरी है क्योंकि जो नहीं सोचा था, वह परिस्थिति उसके सामने खड़ी हो गई है। उसकी प्रतिक्रिया में वह क्या करेगा, पता नहीं। इसका उपाय सावधानी और सामरिक तैयारी है। सामरिक,आर्थिक और कूटनीतिक में हमें चीन से बड़ा होना पड़ेगा। हमको यह करते रहना पड़ेगा, ऐसा करेंगो तो ही चीन को रोक पाएंगे।
आरएसएस चीफ ने कहा, ‘चीन के विस्तारवादी स्वभाव को सब जानते हैं। इस बार उसने एक साथ ताइवान, वियतनाम, अमेरिका, जापाना और भारत के साथ-साथ झगड़ा मोल लिया। लेकिन इस बार अंतर है। इस बार भारत ने उसकी जो प्रतिक्रिया दी, उसके कारण वह सहम गया। उसको धक्का मिला। क्योंकि भारत तन के खड़ा हो गया। भारत की सेना ने अपनी वीरता का परिचय दिया, भारत के नागरिकों ने अपनी देशभक्ति का परिचय दिया।’
कोरोना से भारत को अन्य देशों की तुलना में कम नुकसान
कोरोना पर बोलते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कोरोना की वजह से कई सारे विषय बंद हो गए। मोहन भागवत ने कहा- सरकार की तरफ से सही समय पर उठाए गए कदमों की वजह से भारत को कोरोना के मामले में अन्य देशों की तुलना में कम नुकसान हुआ।
विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारा भारत संकट की इस परिस्थिति में अधिक अच्छे प्रकार से खड़ा हुआ दिखाई देता है। भारत में इस महामारी की विनाशकता का प्रभाव बाकी देशों से कम दिखाई दे रहा है, इसके कुछ कारण हैं। कोरोना की मार ने कई सार्थक बातों की तरफ हमारा ध्यान खींचा है।
कोरोना काल में धैर्य, आत्मविश्वास व सामूहिकता का अनुभूति दिखी
लॉकडाउन के समय आरएसएस सहित समाज के सभी वर्ग के लोगों ने जरूरतमंदों की खुल कर मदद की है। कहीं भोजन बांटने का काम हुआ तो.कही मास्क बांटे गए। स्वतंत्रता के बाद धैर्य, आत्मविश्वास व सामूहिकता की यह अनुभूति पहली बार अनेकों लोगों ने देखा है। इस विषम परिस्थिति में सरकार ने भी तत्परता पूर्वक लोगों को सावधान किया, सावधानी के उपाए बताए और उस पर अमल भी किया।
CAA में किसी संप्रदाय विशेष का विरोध नहीं
सीएए पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा- कुछ पड़ोसी देशों से सांप्रादायिक कारणों से प्रताड़ित होकर विस्थापित किए जाने वाले बंधु, जो भारत में आएंगे उनको मानवता के हित में शीघ्र नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान था। उन देशों में सांप्रदायिक प्रताड़ना का इतिहास है। भारत के इस नागरिकता संशोधन अधिनियम कानून में किसी संप्रदाय विशेष का विरोध नहीं है।
सीएए को आधार बनाकर हिंसा के प्रयास किए गए
मोहन भागवत ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को आधार बनाकर समाज में विद्वेष व हिंसा फैलाने का षडयंत्र चल रहा है। इस कानून को संसद से पूरी प्रक्रिया से पास किया गया। इस षडयंत्र में शामिल लोग मुसलमान भाइयों के मन में यह बैठाने का प्रयास कर रहे हैं कि वे अब भारत में नहीं रहेंगे। आपकी संख्या न बढे इसके लिए कानून बनाई गई, यह बात फैलाया गया।
राम मंदिर के फैसले को सबने सहर्ष स्वीकार किया
राम मंदिर फैसले पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा, ‘9 नवंबर को रामजन्मभूमि के मामले में अपना निर्णय देकर सर्वोच्च न्यायालय ने इतिहास बनाया। भारतीय जनता ने इस निर्णय को संयम और समझदारी का परिचय देते हुए स्वीकार किया।’
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के मौके पर नागपुर में शस्त्र पूजा की। विजयादशमी को संघ का स्थापना दिवस होता है और हर साल इस मौके पर नागपुर मुख्यालय में कार्यक्रम आयोजित होता है।
कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए इस बार संघ के इस कार्यक्रम में सावधानी भी बरती जा रही है। आमतौर पर खुले मैदान में होने वाला यह कार्यक्रम इस बार कोरोना की बंदिशों के बीच आयोजित किया गया है।
-एजेंसियां

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