औद्योगिक पार्क के लिये UPEIDA को ADF ने द‍िए सुझाव

आगरा। उ0प्र0 एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के औद्योगिक पार्क के लिये भूमि की तलाश व चिन्हांकन किया जा रहा है जिसके लिये उस भूमि को चयनित किया जाना चाहिये जिसको आगरा विकास प्राधिकरण अपने आर्थिक संसाधनों के अभाव में छोड़ना चाहता है और यह भूमि 100 मी0 चौड़ी इनर रिंग रोड से लगी हुयी ग्राम रायपुर, रेहनकलां, एत्मादपुर मदरा एवं बुढ़ाना की भूमि क्षेत्रफल 617.0898 हैक्टेयर है। इस आशय की मेल आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (एडीएफ) द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री व उद्योग मंत्री सतीश महाना को भेजी गयी।

मेल द्वारा भेजे गये पत्र में एडीएफ के सचिव के0सी0 जैन अधिवक्ता ने यह उल्लेख किया कि ग्राम रायपुर, ग्राम रेहनकलां, ग्राम एत्मादपुर मदरा एवं बुढ़ाना की 617.0898 हैक्टेयर भूमि के सम्बन्ध में भूमि अध्याप्ति अधिनियम की धारा-4 दिनांकित 14.09.2010, धारा-6 दिनांकित 24.05.2011 एवं कब्जा दिनांकित 07.09.2011 की कार्यवाही हो चुकी है लेकिन उसका मुआवजा अभी तक किसानों को आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा नहीं दिया गया है, ऐसी भूमि पर यूपीडा द्वारा औद्योगिक आस्थान आसानी से विकसित किया जा सकता है। जिसके लिये किसानों को अब मुआवजा वितरित किया जा सकता है।

ऐसा किये जाने से यूपीडा औद्योगिक भूमि को यथाशीघ्र विकसित भी कर सकेगी, अर्जन की लम्बी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा और आगरा विकास प्राधिकरण अर्जित भूमियों के मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी से भी बच सकेगा।

एडीएफ की ओर से यह भी लिखा गया कि आगरा में विकसित औद्योगिक भूमि की नितान्त कमी है। भूमि अधिग्रहण की काफी लम्बी प्रक्रिया होती है। चूंकि आगरा विकास प्राधिकरण के पास आर्थिक संसाधनों का अभाव है इसके चलते प्राधिकरण अप्रयुक्त अर्जित भूमि क्षेत्रफल 607.0898 हैक्टेयर को छोड़ना चाहता है और जिसके सम्बन्ध में प्राधिकरण बोर्ड द्वारा एक प्रस्ताव भी दिनांक 08.03.2019 को पारित किया गया एवं उ0प्र0 शासन को भी उपाध्यक्ष आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा पत्रांक दिनांकित 25.03.2019 प्रेषित किया गया था।

एडीएफ ने पत्र में यह बात उठायी है कि एक ओर आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत कब्जा ली गयी भूमि को छोड़ने की बात हो रही है, दूसरी ओर नयी भूमि की तलाश है। यूपीडा द्वारा यदि कोई अन्य वैकल्पिक भूमि ली जाती है तो उसके अर्जन की प्रक्रिया एवं सोशल इम्पेक्ट अससेटमेंट कराये जाने व जमीन को किसानों से प्राप्त करने में 4-5 वर्ष का समय लग सकता है जिससे तुरन्त औद्योगिक संस्थान विकसित करने की योजना प्रभावित होगी।वैकल्पिक भूमि के लिये वर्तमान दरों पर मुआवजे की राशि के रूप में बाजार मूल्य का 4 गुना का भुगतान करना पड़ेगा।

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