विश्वभारती के छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, नेशन फर्स्ट की अप्रोच लेकर आगे बढ़ें

कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वभारती के छात्रों को संबोधित करते हुए रबींद्रनाथ टैगोर और शिवाजी पर लिखी उनकी कविता के बारे में बताया।
पीएम मोदी ने दीक्षांत समारोह में छात्रों को गुरुदेव का विजन बताते हुए उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने छात्रों को विजन डॉक्युमेंट बनाने को कहा कि भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने तक विश्वभारती के 25 लक्ष्य क्या होंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘कुछ ही समय के अंतराल में दूसरी बार आपको संबोधित करने का मौका मिला है। आप सभी युवा साथियों को माता-पिता को गुरुजनों को मैं बहुत बहुत बधाई देता हूं। अनेक शुभकामनाएं।’
‘जो लोग दुनिया में आतंक फैलाते हैं, उनमें भी शिक्षित होते हैं’
पीएम मोदी ने कहा, ‘कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दुनिया में आतंक फैलाते हैं, डर फैलाते हैं। उनमें भी कई उच्च शिक्षा प्राप्त लोग होते हैं लेकिन दूसरी ओर कुछ ऐसे भी होते हैं जो दुनिया महामारी से दुनिया को मुक्ति दिलाने के लिए दिन रात अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। अस्पतालों में डटे रहते हैं।’
‘ये विचारधारा नहीं, माइंडसेट की बात है’
पीएम मोदी ने कहा, ‘ये सिर्फ विचारधारा का प्रश्न नहीं है। मूल बात को माइंड सेट है। आप क्या करते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि आपका माइंड सेट निगेटिव है या पॉजिटिव। आप समस्या का हिस्सा बनना चाहते हैं या समाधान का। यह हमें तय करना होता है। अगर हम सिर्फ अपना हित देखेंगे तो हम हमेशा चारों तरफ समस्या, मुसीबत, आक्रोश नजर आएगा।’
‘नेशन फर्स्ट की अप्रोच लेकर आगे बढ़ें’
छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘अगर आप खुद से उठकर, स्वार्थ से उठकर नेशन फर्स्ट की अप्रोच लेकर आगे बढ़ेंगे तो यह समस्या में स़ॉल्यूशन ढूंढने का मन करेगा। बुरी स्थिति में भी अच्छा करने का मन करेगा। अगर आपकी नियत साफ है और निष्ठा मां भारती के प्रति है तो आपका हर निर्णय, आपका हर आचरण किसी न किसी समस्या के समाधान की तरफ ही बढ़ेगा।’
‘सफलता या असफलता हमारा भविष्य नहीं तय करतीं’
विश्वभारती में पीएम मोदी ने कहा, ‘सफलता और असफलता हमरा वर्तमान भविष्य नहीं तय करती। जैसा सोचा वैसा परिणाम न मिले लेकिन फैसला लेने से डरना नहीं चाहिए। वह हमारे लिए सबसे संकट का समय है। नया करने का रिस्क लेने का और आगे बढ़ने का जज्बा रहेगा तब तक मुझे देश के भविष्य को लेकर चिंता नहीं रहेगी। जो सपोर्ट चाहिए उसके लिए मैं खुद भी आपके समर्थन में खड़ा हूं।’
’25 साल के लिए 25 लक्ष्य निर्धारित करें’
पीएम मोदी ने छात्रों को विजन डॉक्युमेंट बनाने को कहा। पीएम मोदी ने कहा, ‘मेरा आग्रह है, अगले 25 वर्षों के लिए विश्व भारती के विद्यार्थी मिलकर एक विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। वर्ष 2047 में, जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष का समारोह बनाएगा, तब तक विश्व भारती के 25 सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे, ये इस विजन डॉक्यूमेंट में रखे जा सकते हैं।’
‘फैसला लेने से डरना नहीं चाहिए’
पीएम मोदी ने कहा, ‘हम इस वर्ष अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। विश्व भारती के प्रत्येक विद्यार्थी की तरफ से देश को सबसे बड़ा उपहार होगा कि भारत की छवि को और निखारने के लिए आप ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करें।’ पीएम मोदी ने विश्वभारती के छात्रों से कहा, ‘जिस दिन फैसला लेने में डर लगने लगे, समझना उस दिन आपकी जवानी चली गई।’
Gender Inclusion Fund के बारे में बताया
पीएम मोदी ने बेटियों के योगदान का जिक्र कर कहा, ‘भारत की आत्मनिर्भरता, देश की बेटियों के आत्मविश्वास के बिना संभव नहीं है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार Gender Inclusion Fund की भी व्यवस्था की गई है।’
पीएम मोदी ने कहा, ‘बंगाल ने अतीत में भारत के समृद्ध ज्ञान-विज्ञान को आगे बढ़ाने में देश को नेतृत्व दिया। बंगाल, एक भारत, श्रेष्ठ भारत की प्रेरणा स्थली भी रहा है और कर्मस्थली भी रहा है।’
टैगोर और शिवाजी का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा, ‘आज एक और पावन अवसर है। प्रेरणा का दिन है। आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। सभी देशवासियों को शिवाजी की जयंती की शुभकामनाएं। गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर ने शिवाजी उत्सथ नाम से कवित लिखी थी।’ पीएम मोदी छात्रों को कविता सुनाई और उसका मतलब समझाया।
गांधीवादी धर्मपाल के बारे में बताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधीवादी धर्मपाल के एक किस्से का जिक्र किया। पीएम मोदी ने विश्वभारती के छात्रों को बताया कि 1820 में भारत की साक्षरता दर काफी ऊंची थी। तब गांवों में गुरुकुल और मंदिरों में पढ़ाई अधिक होती थी। पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिटिश शिक्षा पद्धति भारत में थोपे जाने से पहले थॉमस मुनरो ने भी माना था कि हमारी शिक्षा व्यवस्था शानदार है लेकिन उसके बाद के कालखंड में लगातार शिक्षा के क्षेत्र को उतना बल नहीं मिल पाया।
-एजेंसियां

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