जनता के राष्ट्रपति APJ Abdul Kalam की 88वीं जयंती आज

मिसाइलमैन के नाम से मशहूर देश के पूर्व राष्ट्रपति APJ Abdul Kalam की आज जयंती है। भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक और इंजीनियर APJ Abdul Kalam की आज यानी मंगलवार को 88वीं जयंती है। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति थे। देश के सर्वोच्च अवॉर्ड भारत रत्न से सम्मानित हो चुके अब्दुल कलाम को जनता का राष्ट्रपति भी कहा जाता है। उनका पूरा नाम अवुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था। उनका जन्म आज ही के दिन 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था।

एपीजे अब्दुल कलाम ने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) व इसरो को भी संभाला और देश में सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। पूर्व राष्ट्रपति कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से की थी। उन्हें साल 2002 में भारत का राष्ट्रपति बनाया गया था। वहीं, पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद वे वापस शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा में लौट आए थे।

पेशे से मछुआरा परिवार से आने वाले एपीजे अब्दुल कलाम पांच भाई और पांच बहन थे। इनके पिता नाविक थे और मछुआरों को किराए पर नाव दिया करते थे। ऐसा माना जाता है कि कलाम साहब का बचपन काफी गरीबी में बीता है। यही वजह है कि इतने बड़े परिवार का भरन-पोषण करना और शिक्षा दिलाना जब कलाम साहब के पिता के लिए मुश्किल होने लगा तब एपीजे अब्दुल कलाम ने बचपन में अखबार भी बेचा। अखबार बेचकर वह अपने पढ़ाई का खर्च भी निकालते थे।गरीबी में जन्में अब्दुल कलाम रेलवे स्टेशन पर अखबार बेचा करते थे लेकिन उन्होंने अपने हालातों के आगे कभी हिम्मत नहीं हारी और सपनों को मरने नहीं दिया।

उनके जीवन के ये अनसुने किस्से

– डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक होने के साथ मनोवैज्ञानिक भी थे। उन्हे चेहरा पढ़ना भी आता था। वे किसी का भी चेहरा पढ़कर उसके बारे में बता देते थे।

– पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम, उस शख्सियत का नाम है, जो जीवनभर ज्ञान के भूखे रहे और जिसमें दूसरों के भीतर भी ज्ञान की भूख जगाने की अद्भुत क्षमता थी। जिसने हमेशा विकास की बात की। फिर वह डेवलेपमेंट समाज का हो या फिर व्यक्ति का।

– इतना ही नहीं डॉ. कलाम जब भी लखनऊ आए तो एक ओर उन्होंने बच्चों को सवाल पूछने का संकल्प दिलाया वहीं दूसरी ओर युवाओं और बुजुर्गों को घर में लाइब्रेरी बनाने का।

27 जुलाई, 2015 को हुआ निधन

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का 27 जुलाई, 2015 को शिलॉंग में निधन हो गया था वे आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर देने गए थे, इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा भी की गई थी।

1997 में मिला भारत रत्न
एपीजे अब्दुल कलाम को भारत रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें साल 1997 में मिला था। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, रामानुजन पुरस्कार, मानद डॉक्टेरेट, डॉक्टर ऑफ साइंस आदि जैसे कई सम्मान मिल चुके थे।

एपीजे अब्दुल कलाम के अनमोल विचार
सपने वो नहीं हैं जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको नींद ही नहीं आने दें।
जीवन में फेल होते हैं तो कभी हार न मानें क्योंकि फेल (FAIL) मतलब फर्स्ट अटैम्प्ट इन लर्निंग होता है।
अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले आपको सूरज की तरह तपना होगा।
आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बीमारी को मारने के लिए सबसे बढि़या दवाई है।
इंतजार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।

– एजेंसी

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