दिवाली पर अनार से ही जलते हैं 80 प्रतिशत लोग

दिवाली पर कई प्रकार के पटाखे जलाए जाते हैं, जिसमें अनार की रोशनी हर किसी को आकर्षित करती है। सबसे ज्यादा जख्म भी अनार ही देता है।
डॉक्टरों के मुताबिक हर साल दिवाली में आने वाले बर्न के मामले में 80 पर्सेंट लोग अनार से ही जले होते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि अनार में आवाज नहीं होती है, इस वजह से लोग इसे हल्के में लेते हैं और जरा-सी लापरवाही से जल जाते हैं। अनार के अलावा 10 पर्सेंट लोग डिब्बा बम से जलते हैं। बाकी 10 पर्सेंट लोग लड़ी पटाखा या दूसर पटाखों से जलते हैं।
15 से 30 सेकंड में मिलता जख्म
एलएनजेपी के बर्न विभाग के डॉक्टर पी. एस. भंडारी ने कहा कि अनार को लोग हल्के में लेते हैं लेकिन पटाखों में यह सबसे अधिक खतरनाक है। अनार को जलने में 15 से 30 सेकंड का समय लगता है और यही इसे खतरनाक भी बनाता है। लोग उसे बुझा हुआ समझकर उसे फिर से जलाने के लिए उस पर झुक जाते हैं और अधिकांश मामले में यह अचानक जल उठता है, जिससे सामने वाले का चेहरा जल जाता है। अक्सर लोग अनार को हाथ में लेकर जलाते हैं, कई बार इसका पीछे का पार्ट जल जाता है जिससे हाथ चल जाता है।
दरअसल, इस ‘साइलेंट किलर’ के आवाज नहीं करने की वजह से बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी इसे जलाने के प्रति उतने सजग नहीं होते, जितने बाकी पटाखों को जलाने के वक्त होते हैं।
दीये से भी जलते हैं लोग
डॉ. भंडारी ने कहा कि भले ही संख्या में अनार सबसे ज्यादा घायल करता है लेकिन दीये से जलने वाले को जख्म ज्यादा देता है। यह महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं पर्व त्योहार पर ढीले कपड़े पहनती हैं, चाहे साड़ी हो या सलवार। ढीले कपड़े होने की वजह से यह तेजी से फैल जाता है। इस वजह से जलने का प्रतिशत भी ज्यादा होता है।
‘डिब्बा बम’ है खतरनाक, हर 10 में से एक को करता है घायल
डॉक्टरों का कहना है शरारती लोगों के द्वारा बम को डिब्बे में रखकर विस्फोट करने की वजह से करीब 10 पर्सेंट लोग घायल होते हैं। दिवाली की रात केवल 10 पर्सेंट लोग ही लड़ी वाले पटाखों या दूसरे पटाखों से जलते हैं। डॉक्टर का मानना है कि बम से लोग कम जलते हैं क्योंकि इसकी जोरदार आवाज से लोगों में डर रहता है और वे सजग रहते हैं।
जलने पर क्या करें?
1- स्किन के जले हुए हिस्से पर बरनॉल, नीली स्याही या फिर दवा न लगाएं
2- झुलसे हुए हिस्से को बहते पानी में तब तक रखें, जब तक जलन पूरी तरह से खत्म न हो जाए
3- आंखों में जलन होने पर ठंडे पानी के छींटे मारें और जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं, वरना एलर्जी बढ़ सकती है
4- धुएं और पल्यूशन से अस्थमा और फेफड़े में प्रॉब्लम
5- साउंड पल्यूशन बढ़ जाता है, जिससे लोगों के सुनने की शक्ति पर असर होता है
6- मुंह के अंदर शीशा जाने से फेफड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका
7- आंखों में जलन और त्वचा में संक्रमण हो सकता है
8- चिंगारी छिटकने से आंख की कॉर्निया पर बुरा असर
बरतें ये सावधानियां
1- जहां तक मुमकिन हो, पटाखे जलाने से बचें
2- बच्चे अगर न मानें तो पटाखे जलाते वक्त उनके साथ रहें
3- दुर्घटना से बचने के लिए साथ में पानी की बाल्टी रखें
4- टिन या कांच की बोतल में रखकर पटाखा न जलाएं
5- दमा और अस्थमा के मरीज घर से बाहर न जाएं
6- ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कान में रुई डाल लें
-एजेंसियां

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