राम मंदिर के भूम‍िपूजन को 150 नदियों का जल लेकर अयोध्या पहुंचे 70 वर्षीय दो भाई

अयोध्या। इसे राम के प्रत‍ि अगाध श्रद्धा ही कहा जाएगा कि उम्र के सात दशक न‍िकाल चुके दो सगे भाई आज रविवार को अयोध्या में 150 से अधिक नदियों का जल इकट्ठा करके पहुंचे, इसका इस्तेमाल भूमि पूजन में किया जाएगा। 70 साल से अधिक उम्र के दो भाई राधेश्याम पांडे और शबद वैज्ञानिक महाकवि त्रिफला 1968 से श्रीलंका के सोलह स्थानों से मिट्ठी के साथ-साथ भारत की आठ नदियों, तीन समुद्रों से पानी इकट्ठा कर रहे हैं।

राधे श्याम पांडे ने न्यूज एजेंसी को बताया, “यह मेरा हमेशा से ही सपना रहा है कि जब भी राम मंदिर का निर्माण होगा, मैं भारत की नदियों के पवित्र जल और श्रीलंका से मिट्टी एकत्र करूंगा और श्री राम की कृपा से वह लक्ष्य हासिल हो गया है। हमने 151 नदियों से पानी एकत्र किया है। इनमें श्रीलंका की 8 बड़ी नदियां, तीन समुद्र और 16 स्थानों की मिट्टी भी शामिल है।“ उन्होंने कहा, “1968 से 2019 तक, मैंने इसे इकट्ठा करने के लिए पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल, ट्रेन और हवाई जहाज का सफर किया।”

करीब आठ हजार पवित्र स्थलों से मिट्टी, जल का उपयोग किया जाएगा
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन में देशभर के करीब आठ हजार पवित्र स्थलों से मिट्टी, जल और रजकण का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि सामाजिक समरसता का संदेश देने के लिए देशभर से मिट्टी एवं जल का संग्रह किया जा रहा है।

देशभर से अयोध्या पहुंचने वाली मिट्टी एवं जल का आंकड़ा अभी तक जोड़ा नहीं गया है, लेकिन ऐसा अनुमान है कि सात-आठ हजार स्थानों से मिट्टी, जल एवं रजकण पूजन के लिए अयोध्या पहुंचेगा। दो दिन पहले तक करीब 3,000 स्थानों से मिट्टी और जल वहां पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि मिट्टी और जल एकत्र करने का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का अनूठा उदाहरण है।

राम के प्रत‍ि अगाध श्रद्धा का एक और उदाहरण देख‍िये क‍ि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने बताया क‍ि जब हम झारखंड में ‘सरना स्थल आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है। जब हम उस स्थान की मिट्टी एकत्र करने गए तो दलित और आदिवासी समाज में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल देखने को मिला। उनका कहना था कि राम और सीता तो हमारे हैं, तभी हमारी माता शबरी की कुटिया में पधारे और जूठे बेर खाए।

विहिप सूत्रों ने बताया कि इसी श्रृंखला में काशी स्थित संत रविदास जी की जन्मस्थली, बिहार के सीतामढ़ी स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम, महाराष्ट्र में विदर्भ के गोंदिया जिला के कचारगड, झारखंड के रामरेखाधाम, मध्य प्रदेश के टंट्या भील की पुण्यभूमि से जुड़े स्थलों, पटना के श्रीहरमंदिर साहिब, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जन्मस्थान महू, दिल्ली के जैन मंदिर और वाल्मीकि मंदिर जैसे स्थलों से मिट्टी एवं पवित्र जल एकत्र किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के कालीघाट, दक्षिणेश्वर, गंगासागर और कूचबिहार के मदन मोहन जैसे मंदिरों की पवित्र मिट्टी के साथ ही गंगासागर, भागीरथी, त्रिवेणी नदियों के संगम से जल अयोध्या भेजा जा रहा है। प्रयागराज के पावन संगम के जल एवं मिट्टी का भी भूमि पूजन में उपयोग किया जाएगा ।

बिहार की फल्गु नदी से बालू और रेत भी अयोध्या भेजा जा रहा
भूमि पूजन से जुड़े लोगों ने बताया कि बिहार की फल्गु नदी से बालू और रेत भी अयोध्या भेजा जा रहा है। गया धाम स्थित यह नदी पवित्र पितृ-तीर्थ है। इसके अलावा पावापुरी स्थित जलमंदिर, कमल सरोवर, प्रचीन पुष्करणी तालाब, हिलसा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से जुड़े भोरा तालाब, राजीगर की पंच वादियों की मिट्टी और जल भी भेजा जा रहा है। विहिप पदाधिकारियों ने कहा कि भूमि पूजन के लिए मंदराचल पर्वत की मिट्टी भी भेजी गई है। पौराणिक मान्यता है कि इसी पर्वत से समुद्र मंथन किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी मिट्टी, जल एवं रजकण भेजने का सिलसिला जारी है। – एजेंसी

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