संस्कृति विश्वविद्यालय ने फाइल किये 5 Patents

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता एवं मिसाल कायम करते हुए Registrar of Patents of India के पास 5 Patents एप्लीकेशन फाइल किये हैं।

संस्कृति विश्वविद्यालय अपने सभी शिक्षकों को विभिन्न क्षेत्रों में शोध एवं अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। संस्कृति विश्वविद्यालय ने समय समय पर शिक्षकों को शोध तथा अन्वेषण हेतु ज्ञान एवं कौशल प्रदान करने के लिए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का भी आयोजन किया है। कुछ माह पूर्व मार्शल यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. अविनन्दन मुखर्जी ने शोध, अन्वेषण एवं शोध के प्रकाशन तथा पेटेंट फाइल करने के बारे में विभिन्न शिक्षकों तथा विभागाध्यक्षों के साथ विस्तार से चर्चा की थी।

संस्कृति विश्वविद्यालय ने हाल ही में विभिन्न विभागों के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी शोध एवं अन्वेषण क्षेत्र में ज्यादा योगदान देने वाले शिक्षकों को प्रश्रय दिया था ताकि संस्कृति विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में शोध एवं अन्वेषण, प्रकाशन तथा पेटेंट्स के कार्यक्रमों को तेज गति तथा नया आयाम मिल सके।

संस्कृति विश्वविद्यालय ने आटोमेटिक इरीगेशन सिस्टम, लिक्विड फ्लो मैनेजमेंट सिस्टम, फॉल प्रोटेक्शन सिस्टम, डोर एक्सेस कण्ट्रोल सिस्टम एवं सिस्टम फॉर इमेजिंग बायोलॉजिकल मैक्रोमोलीक्यूल्स के क्षेत्र में ५ पेटेंट रजिस्ट्रार ऑफ़ पेटेंट्स ऑफ़ इंडिया के पास फाइल किया है।

कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों को विभिन्न क्षेत्रों में शोध एवं अन्वेषण करके अपने शोध पत्रों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जर्नल्स में प्रकाश‍ित कराने तथा अन्वेषणों को पेटेंट के रूप में रजिस्टर कराने के लिए प्रतिबद्ध तथा दृढ़ प्रतिज्ञ रहना होगा ताक‍ि हम सभी छात्रों को आधुनिकतम तथा नवीनतम ज्ञान, कौशल तथा शोध जनित ज्ञान प्रदान करने की परंपरा को नयी गति तथा दिशा प्रदान कर सकें ।

उप कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को तेजी से बदल रहे वैश्विक परिदृश्य एवं तकनीकी बदलावों के दौर में शोध एवं अन्वेषण की महत्ता को समझते हुए जर्नल्स में प्रकाशन तथा अन्वेषणों को पेटेन्ट के रूप में फाइल करके अपने द्वारा अर्जित ज्ञान हो मूर्त रूप देकर भारत एवं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊँचा करने के लिए प्रयासरत रहना होगा।

एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पी सी छाबड़ा ने अपने सन्देश में कहा कि नैक तथा एनआईआरऍफ़ रैंकिंग की प्रक्रिया में भी शोध तथा अन्वेषण तथा प्रकाशन की भूमिका अहम रहती है और बढ़ती जा रही है। शिक्षकों के द्वारा किये गए विभिन्न क्षेत्रों में शोध एवं अन्वेषण के लिए उन्हें समय समय पर प्रोत्साहित, उत्साहित एवं पुरस्कृत भी किया जायेगा।

कुलपति डॉ राणा सिंह ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध एवं अन्वेषण, पेटेंट इत्यादि के क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है ताकि शीघ्र ही विश्वविद्यालय राष्ट्रीय पटल पर शिक्षा के साथ ही शोध एवं अन्वेषण के क्षेत्र में भी अग्रणी विश्वविद्यालयों की श्रेणी में अव्वल गिना जाये। उन्होंने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए कार्यरत सभी शिक्षकों को उचित संसाधन एवं माहौल निर्बाध गति से देता रहेगा।

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