32 साल पहले चीन की ने आज किया था 10 हजार लोगों का कत्‍ल

आज से 32 साल पहले चीन की राजधानी पेइचिंग के थ्येनआनमन चौक पर जून 1989 में लोकतंत्र समर्थकों ने सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध को दबाने के लिए चीनी सरकार के आदेश पर हुई सैन्य कार्यवाही में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। दो साल पहले सार्वजनिक हुए ब्रिटिश खुफिया राजनयिक दस्तावेज में इस घटना का पूरा ब्योरा दर्ज है।
ब्रिटिश दस्तावेज में मौत के आंकड़ों खुलासा
चीन में पोस्टेड तत्कालीन ब्रिटिश राजदूत एलन डोनाल्ड ने लंदन भेजे गए पत्र में लिखा था कि इस घटना में कम से कम 10 हजार लोगों की मौत हुई थी। इस पत्र को ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव्ज में रखा गया है। चीन में उस समय इस घटना की रिपोर्टिंग को भी चीन से बड़े पैमाने पर सेंसर कर दिया था। इस घटना की रिपोर्टिंग पर चीन में आज भी कड़े प्रतिबंध हैं।
क्या थी पूरी घटना
जून 1989 में पेइचिंग के थ्येनआनमन चौक पर लाखों की संख्या में लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारी इकठ्ठा हुए थे। इसमें बड़ी संख्या में छात्र और मजदूर भी शामिल थे। ये विरोध प्रदर्शन कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव और सुधारवादी हू याओबांग की मौत के बाद शुरू हुए थे। हू याओबांग को चीन की तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक और आर्थिक नीतियों में विरोध के कारण पद से हटा दिया था। जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
टैंक और गोलियों से लोगों को बनाया गया था निशाना
छह हफ्ते तक चले इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए 4 जून को चीन की सेना ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर बंदूकों और टैंकों से कार्यवाही की। इस कार्यवाही में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गये थे। इस दौरान चीनी सेना के एक टैंक को रोकने की कोशिश करते हुए एक युवक की तस्वीर प्रकाशित होने के बाद यह स्थान पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।
चीन ने कार्यवाही को पूरी तरह से सही बताया
चीन ने पेइचिंग के ऐतिहासिक थियानमेन चौक नरसंहार को पूरी तरह से सही करार दिया। साथ ही यह भी कहा कि उसका समाजवादी राजनीतिक मॉडल सही चुनाव है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने इस प्रदर्शन को एक राजनीतिक व्यवधान करार दिया। उन्होंने कहा कि हम चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद को जारी रखने के लिये प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अमेरिका को वैचारिक पूर्वाग्रह दूर रखने, गलतियों को सुधारने और चीन के घरेलू मामलों में किसी भी तरह से दखलअंदाजी रोकने को कहा।
-एजेंसियां

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