सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत और सजा निलंबित करने से संबंधित 1072 मामले लंबित

नई द‍िल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI अधिनियम) के तहत एक आवेदन के जवाब में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। आरटीआई के आवेदन के जवाब में यह जानकारी मिली है कि सुप्रीम कोर्ट में 18 दिसबंर, 2020 तक जमानत और सजा निलंबित करने से संबंधित 1072 मामले लंबित हैं। इसमें जमानत/ अंतरिम जमानत 931 याचिकाएं शामिल हैं, वहीं 141 याचिका सजा निलंबित करने की हैं। यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले द्वारा दायर आवेदन के जवाब में सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त रजिस्ट्रार और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी, अजय अग्रवाल द्वारा दी गई है।

गोखले की आरटीआई अर्जी ने पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के सामने रिपब्लिक टीवी के एंकर अरनब गोस्वामी की जमानत याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए दायर किया था, जिसमें निम्नलिखित जानकारी मांगी गई थी: 1. कृपया भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के पास लंबित अंतरिम जमानत के आवेदनों की वर्तमान संख्या बताएं कि 12/11/2020 तक इस संबंध में अभी तक पहली सूची नहीं थी। 2. कृपया रजिस्ट्री मेंं अंतरिम जमानत आवेदन दाखिल करने और उचित माननीय बेंच के सामने उनके सूचीबद्ध होनेके बीच औसत वेटिंग पीयरेड बताएं।

3. 18 दिसंबर को दिए गए उत्तर में सुप्रीम कोर्ट के सीपीआईओ ने कहा कि अंतरिम जमानत आवेदनों के संबंध में एससी द्वारा कोई जानकारी नहीं रखी गई थी। उत्तर में कहा गया है, “सूचना डेटा आपके द्वारा मांगे गए तरीके से नहीं रखा जाता है।” हालांकि, जवाब में एससी में लंबित जमानत और सजा निलंबन से संबंधित मामलों की संख्या से संबंधित जानकारी है। “सुप्रीम कोर्ट के अधीन श्रेणी 1409 के अनुसार जो “जमानत/अंतरिम जमानत/अग्रिम जमानत से संबंधित आपराधिक मामले” से संबंधित है, उपरोक्त विषय से संबंधित लंबित SLP मामलों की संख्या (ICMIS सॉफ्टवेयर में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) 18.12.2020 को 931 है (जिसमें न केवल अंतरिम जमानत बल्कि जमानत/अग्रिम जमानत आदि से संबंधित मामले भी शामिल हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट विषय 1414 के अनुसार, जो “सजा के निलंबन से संबंधित आपराधिक मामले” से संबंधित है, उपरोक्त विषय से संबंधित लंबित मामलों की संख्या (ICMIS सॉफ्टवेयर में 18.12.2020 तक उपलब्ध डेटा के अनुसार) 141 है।”

गोखले द्वारा अंतरिम जमानत के आवेदन दाखिल करने और पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के बीच की औसत प्रतीक्षा अवधि के बारे में की गई दूसरी क्वेरी के संबंध में सीपीआईओ ने कहा कि कोई भी जानकारी / डेटा बनाकर नहीं रखा गया है। “जानकारी/डेटा उस तरीके से बनाकर नहीं रखा जाता है, जैसा कि मांगी गई है। हालांकि, सभी मामले सूचीबद्ध/हटाए गए हैं। वेबसाइट www.sci.gov.in लिंक के तहत दिशानिर्देशों, अभ्यास और प्रक्रिया के अनुसार जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। मानदंड और प्रक्रिया और माननीय न्यायालय के परिपत्रों और सामान्य या विशिष्ट निर्देशों के अनुसार भी। इसलिए, आप वांछित जानकारी प्राप्त करने के लिए वेबसाइट पर जा सकते हैं।”

जबकि राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड देश में विषय-वार हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में मामलों की पेंडेंसी के बारे में डेटा देता है, लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट में मामलों की पेंडेंसी के बारे में जानकारी नहीं देता है। अरनब गोस्वामी द्वारा 9 नवंबर को याचिका दायर करने के एक दिन के भीतर तत्काल सूची, वह भी तब जब अदालत दीवाली की छुट्टियों के लिए बंद थी, ने कानूनी समुदाय के भीतर कई आपत्तियाँ उठाई थीं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने एससी रजिस्ट्री को पत्र लिखकर गोस्वामी की याचिका को ‘चयनात्मक सूची’ के बारे में शिकायत की।

दुष्यंत दवे ने टिप्पणी की, “यह प्रशासनिक शक्ति का घोर दुरुपयोग है, जिसने भी इसे प्रशासनिक पक्ष पर प्रयोग किया है। यह इस बात का आभास देता है कि कुछ वकीलों के क्लाइंंट को विशेष ट्र्रीटमेंट मिल रहा है।”

  • Courtsey: Livelaw

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